सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने काजल के साथ अपने रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी; बोले— ‘वह तब भी सही थीं, आज भी सही हैं’

भोजपुरी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक खेसारी लाल यादव इस वक्त अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ और अपने संघर्ष के दिनों को लेकर हर तरफ चर्चा में बने हुए हैं। एक वक्त था जब खेसारी लाल यादव का नाम भोजपुरी की खूबसूरत अदाकारा काजल राघवानी के साथ हर महफिल में जोड़ा जाता था। लंबे समय तक चली इस बॉन्डिंग और फिर आई दूरियों पर अब खुद खेसारी लाल यादव ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है।

लेकिन बात सिर्फ काजल राघवानी की नहीं है, खेसारी ने अपने बचपन की उस भयानक गरीबी का भी जिक्र किया है, जब उनके पास रहने को खुद की जमीन तक नहीं थी और उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर लिट्टी-चोखा तक बेचा था।

भोजपुरी इंडस्ट्री में खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी की जोड़ी को दर्शकों ने पर्दे पर जितना प्यार दिया, असल जिंदगी में उनके रिश्ते और ब्रेकअप ने उतनी ही सुर्खियां बटोरीं। हाल ही में इस पर खुलकर बात करते हुए खेसारी ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि— जब मैं काजल के साथ था, तब वह मेरे लिए बिल्कुल सही थीं और सच कहूं तो आज भी सही हैं। अक्सर लोगों को लाइफ में प्यार हो जाता है, लेकिन बाद में वो मर्द की एक आदत बन जाता है।

खेसारी ने आज के दौर के रिश्तों पर तीखा तंज कसते हुए आगे कहा कि— जब तक लोगों के बीच प्यार रहता है, तब तक वो एकदूसरे को बेबीसोनाकहते नहीं थकते। लेकिन जैसे ही ब्रेकअप हो जाता है, लोग एकदूसरे की कमियां निकालने लगते हैं और बुराई करने लगते हैं, जो कि बेहद गलत बात है। खेसारी का यह बेबाक अंदाज साफ करता है कि ब्रेकअप के बाद भी वो अपने अतीत की पूरी इज्जत करते हैं।

आज करोड़ों की गाड़ियों में घूमने वाले खेसारी लाल यादव की जिंदगी हमेशा से ऐसी नहीं थी। अपने बचपन के दिनों को याद कर खेसारी ने बताया कि उनका परिवार इस कदर गरीब था कि उनके पास अपनी खुद की जमीन भी नहीं थी। पिता दिल्ली में मजदूरी करते थे और खेसारी गांव में अपने चाचा के साथ रहते थे। बेहद छोटी उम्र में खेसारी साइकिल पर घर-घर जाकर दूध बेचा करते थे, और इसी दौरान उन्हें गाने का शौक चढ़ा।

इसके बाद साल 2004 में वो दिल्ली आ गए। साल 2004 से 2007 के बीच खेसारी ने दिल्ली के ओखला इलाके में सड़क किनारे लिट्टी-चोखा बेचने का काम किया। वो दिनभर चिलचिलाती धूप में लिट्टी-चोखा बेचते थे और रात के अंधेरे में पूरी शिद्दत से गाने की प्रैक्टिस करते थे। यह वो दौर था जिसने खेसारी को अंदर से एक फौलाद कलाकार बना दिया।

साल 2006 में खेसारी की शादी हुई। शादी के बाद उनके पिता ने जैसे-तैसे जोड़-तोड़ कर उन्हें गाना रिकॉर्ड करने के लिए 11 हजार रुपये दिए। इस पैसे से खेसारी ने अपनी पहली एल्बम निकाली, जो बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। दूसरी कैसेट को थोड़ा बहुत रिस्पॉन्स मिला, लेकिन असली जादू होना अभी बाकी था। साल 2008 में खेसारी के घर उनकी बेटी कृतिका जन्म हुआ, जिसे अभिनेता अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा लकी चार्म मानते हैं।

बेटी के जन्म के ठीक बाद उनका एक गाना रिलीज हुआ जो रातों-रात पूरे देश में आग की तरह फैल गया। इस एक गाने ने खेसारी को सड़क से उठाकर स्टारडम के शिखर पर बैठा दिया और उनकी गरीबी हमेशा के लिए खत्म हो गई।

दूध बेचने और लिट्टी-चोखा के ठेले से लेकर भोजपुरी सिनेमा का किंगबनने तक का खेसारी लाल यादव का यह सफर हर उस इंसान के लिए मिसाल है जो अपनी गरीबी से लड़कर कुछ बड़ा करना चाहता है। साथ ही काजल राघवानी पर दिया उनका यह मैच्योर बयान भी लोगों को काफी पसंद आ रहा है। खेसारी लाल यादव के इस पूरे संघर्ष और उनके इस नए बयान पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

 

 

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