आज के इस आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में हर दूसरा इंसान तनाव और बीमारियों से घिरा हुआ है। ऐसे में हमें एक ऐसे मार्गदर्शक की जरूरत है जो हमारे प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान से हमें स्वस्थ रहने की राह दिखाए। इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक बेहद खास और प्रेरणादायक पुस्तक “निरोगता के सूत्र – गुरबाणी एवं श्रीमद्भगवद्गीता के आलोक में” का भव्य लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. इन्द्रेश कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार और आध्यात्मिक गुरु बाबा भूपिंदर सिंह पटियाला जैसी महान विभूतियों की मौजूदगी में इस पुस्तक को देश के सामने रखा गया। यह पुस्तक सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक निरोगता का एक बड़ा दस्तावेज है।
इस अद्भुत और जीवन-बदल देने वाली पुस्तक को लिखा है डॉ. शाम लाल कठपालिया ने, जिसमें उनका पूरा सहयोग उनकी सुपुत्री गीता कठपालिया आहूजा द्वारा किया गया है। आपको बता दें कि डॉ. कठपालिया संघ के एक बेहद कर्मठ स्वयंसेवक हैं, वहीं पिता और पुत्री की यह जोड़ी ‘दधीचि देहदान समिति‘ की सक्रिय कार्यकर्ता भी है। गीता आहूजा विद्या भारती और दधीचि देहदान समिति में केंद्रीय स्तर पर बड़े दायित्वों को संभाल रही हैं।
इस परिवार की सबसे बड़ी और अनुकरणीय बात यह है कि डॉ. कठपालिया से प्रेरणा लेकर उनके परिवार के सभी सदस्यों ने अंगदान और देहदान का महासंकल्प लिया हुआ है। यही वजह है कि इस पुस्तक का एक पूरा अनुभाग ‘दधीचि देहदान समिति‘ और मानवता की सेवा को समर्पित किया गया है, जो पाठकों को जीवन के बाद भी दूसरों को जिंदगी देने के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इन्द्रेश कुमार ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य की एक नई और कड़क परिभाषा दी। उन्होंने कहा कि— ‘किसी का अहित न करना, यानी किसी का बुरा न सोचना ही सबसे बड़ी निरोगता है।‘ वहीं विशिष्ट अतिथि और दधीचि देहदान समिति के संस्थापक वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने अध्यात्म को स्वास्थ्य से जोड़ते हुए कहा कि— ‘स्व‘ का वास्तविक अर्थ ईश्वर है, और जहाँ ‘स्व‘ है, वहीं वास्तविक स्वास्थ्य और निरोगता वास करती है। उन्होंने इस पुस्तक को भारतीय जीवन-दर्शन का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
इसके साथ ही आध्यात्मिक गुरु बाबा भूपिंदर सिंह पटियाला ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक मनुष्य अपने भीतर नहीं झाँकता, तब तक वह कभी भी वास्तविक निरोगता प्राप्त नहीं कर सकता। इन महान विचारों ने वहां मौजूद सैकड़ों श्रोताओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
इस गरिमापूर्ण समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री, दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और दधीचि देहदान समिति के पूर्व अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की उपस्थिति ने सभा में एक नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने लेखक डॉ. शाम लाल के इस सराहनीय प्रयास की जमकर प्रशंसा की और अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
इस भव्य लोकार्पण कार्यक्रम में दधीचि देहदान समिति, विद्या भारती, आरोग्य भारती और जीओ गीता के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग सम्मिलित हुए। कार्यक्रम स्थल पर दधीचि देहदान समिति द्वारा एक विशेष स्टॉल भी लगाया गया था, जहां दक्षिणी और पश्चिम दिल्ली क्षेत्र विभाग के कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अंगदान और देहदान को लेकर लोगों के मन में उठने वाली तमाम जिज्ञासाओं को शांत किया और जागरूकता पत्रक भी वितरित किए।
श्रीमद्भगवद्गीता और गुरबाणी के आलोक में लिखी गई यह पुस्तक निश्चित रूप से समाज को मानसिक तनाव से मुक्ति और शारीरिक आरोग्यता की एक नई राह दिखाएगी।

