सियासत की दुनिया में एक पुराना वीडियो, एक नया मामला और एक बड़ा बवाल। बीजेपी सांसद रवि किशन का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर कुछ इस तरह वायरल किया गया कि मानों उन्होंने बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर पर कोई टिप्पणी कर दी हो। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, विवाद ने तूल पकड़ लिया। लेकिन अब रवि किशन ने मोर्चा संभालते हुए इस पूरे मामले पर न सिर्फ सफाई दी है, बल्कि अफवाह फैलाने वालों को चेतावनी भी दे दी है।
डिजिटल युग में ‘सच‘ से ज्यादा तेजी से ‘अफवाह‘ दौड़ती है। हाल ही में सोशल मीडिया पर बीजेपी सांसद रवि किशन का एक वीडियो शेयर किया गया, जिसमें वे एनकाउंटर की नीति का बचाव करते नजर आ रहे थे। वीडियो में वे कह रहे हैं कि एनकाउंटर किसी शरीफ आदमी का नहीं, बल्कि अपराधियों का होता है। देखते ही देखते इस क्लिप को बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर से जोड़कर पेश कर दिया गया।
नैरेटिव ऐसा सेट किया गया कि जैसे सांसद रवि किशन ने भरत तिवारी के केस पर यह बयान दिया हो। देखते ही देखते यह मामला सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। लेकिन, रवि किशन ने इस पूरे विवाद को सिरे से खारिज करते हुए सोशल मीडिया ‘एक्स‘ पर एक तीखा और स्पष्ट वीडियो संदेश जारी किया।
रवि किशन की ओर से जारी बयान में एक बहुत ही गंभीर और वैचारिक बात कही गई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि किसी पुराने या अलग संदर्भ के बयान को नए मामले से जोड़कर पेश करना भ्रम पैदा करता है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “लोकतांत्रिक विमर्श में तथ्यों और संदर्भों की शुद्धता उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी किसी मुद्दे पर अपनी राय रखना।“
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर चल रहे ‘फेक न्यूज़‘ के उस खेल को उजागर कर दिया है, जहाँ लोग व्यूज और लाइक्स के चक्कर में सच को किनारे कर देते हैं। रवि किशन ने जिन शब्दों में चेतावनी दी है, वो उन सभी के लिए एक सबक है जो बिना सच्चाई जाने, किसी भी बयान को ‘संदर्भ‘ (Context) से अलग करके उसे सनसनी बनाने की कोशिश करते हैं।
रवि किशन ने तो अपनी बात साफ कर दी है। वीडियो पुराना है, संदर्भ अलग है और जो लोग इसे नई घटना से जोड़कर पेश कर रहे थे, अब उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस पूरे मामले से ये समझना होगा की सोशल मीडिया पर जो दिखता है, वो हमेशा सच नहीं होता।

