छात्रों के हक की लड़ाई में साथ आए दोनों भाई, तेजस्वी के ‘लोकभवन मार्च’ को तेज प्रताप का खुला समर्थन

बिहार, पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और रोजगार के मुद्दों को लेकर सियासत पूरी तरह गरमा गई है। बुधवार को राजधानी पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आयोजित विशाल ‘लोकभवन मार्च’ को उस समय बड़ा राजनीतिक संबल मिला, जब उनके बड़े भाई और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने इस आंदोलन को अपनी पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ की ओर से खुला समर्थन देने का ऐलान किया।

सीवान घटना पर आक्रोश: ‘छात्रों पर गोलीबारी बेहद चिंताजनक’

तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा बयान जारी कर राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। हाल ही में सीवान में छात्रों पर कथित एके-47 से हुई गोलीबारी की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे राज्य के युवाओं के लिए अत्यंत दुखद और चिंताजनक बताया।

तेज प्रताप यादव ने अपने बयान में लिखा:

“सीवान में छात्रों पर हुई फायरिंग और निर्दोष छात्रों के घायल होने की घटना बेहद चिंताजनक और निंदनीय है। पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों व नौजवानों के हक की लड़ाई लगातार जारी है। इन्हीं जनहित के मुद्दों को लेकर हुए पूर्व के छात्र आंदोलन में मैंने भी सक्रिय रूप से भाग लिया था और छात्रों की आवाज उठाने के कारण मुझे तीन दिनों तक जेल में भी रहना पड़ा था।”

तेजस्वी के मार्च का समर्थन: ‘जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, लड़ाई जारी रहेगी’

अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव द्वारा निकाले गए मार्च के प्रति एकजुटता दिखाते हुए तेज प्रताप ने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के सवाल पर कोई समझौता नहीं होगा।

उन्होंने आगे लिखा:

“आज अगर राजद नेता श्री तेजस्वी यादव जी छात्रों और नौजवानों की जायज मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर ‘लोकभवन मार्च’ निकाल रहे हैं, तो ‘जनशक्ति जनता दल’ की ओर से मैं इस मार्च और युवाओं के हित में उठाई जा रही इस बुलंद आवाज का पूर्ण समर्थन करता हूँ। जनशक्ति जनता दल हमेशा छात्रों और नौजवानों के संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा। छात्रों का हक—हमारी लड़ाई! युवाओं की आवाज—हमारी आवाज!”

छात्र आंदोलन और तेज प्रताप का पूर्व घटनाक्रम

गौरतलब है कि कुछ समय पहले जब पटना की सड़कों पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने व्यापक प्रदर्शन किया था, तब तेज प्रताप यादव स्वयं उनके समर्थन में सड़क पर उतरे थे। उस दौरान पुलिस ने उन्हें एक शॉपिंग मॉल परिसर से हिरासत में लिया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत के तहत तीन दिन जेल में भी बिताने पड़े थे। अब जब तेजस्वी यादव ने छात्रों के अधिकारों को लेकर सीधे राजभवन/लोकभवन तक मार्च निकालने का फैसला किया, तो तेज प्रताप ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने पुराने स्टैंड को दोहराते हुए इस आंदोलन को ताकत दी।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में इस समर्थन के मायने

बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ समय से दोनों भाइयों के अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर सक्रिय रहने के बाद, छात्रों और बेरोजगारी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दोनों का एक सुर में बोलना राज्य की सियासत में विपक्ष की धार को और तेज करेगा।

  • युवा वोट बैंक पर असर: राज्य में लगातार उठ रहे पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मुद्दों पर विपक्ष की यह साझा रणनीति सरकार पर दबाव बढ़ाने का काम करेगी।

  • सड़क से सदन तक घेराबंदी: लोकभवन मार्च और तेज प्रताप के समर्थन के बाद यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन सिर्फ पटना तक सीमित न रहकर पूरे राज्य में व्यापक रूप ले सकता है।

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