नई दिल्ली। विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर दधीचि देहदान समिति की ओर से दिल्ली के डिफेंस एन्क्लेव में अंगदान चेतना अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अंगदान और देहदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों को इस महादान के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी तथा विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और दधीचि देहदान समिति के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट आलोक कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अंगदान को सामाजिक आंदोलन बनाने और परिवारों में इस विषय पर खुलकर चर्चा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली भाजपा और दधीचि देहदान समिति का संकल्प है कि अंगदान को सामाजिक आंदोलन बनाया जाए। उन्होंने लोगों से अंगदान का संकल्प लेने और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसकी जानकारी देने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को स्पेन और श्रीलंका जैसे देशों से सीख लेने की आवश्यकता है, जहां अंग और नेत्रदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है।
हर्ष मल्होत्रा ने देहदान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मानव जीवन को बचाने और चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए मानव देह की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि मानव शरीर के बिना चिकित्सा शिक्षा और जीवनरक्षक अनुसंधान से जुड़े अनेक प्रयोग संभव नहीं हो सकते।
दधीचि देहदान समिति के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट आलोक कुमार ने कहा कि समिति का उद्देश्य “हर घर में अंगदान की चर्चा और हर मन में दान की भावना” पैदा करना है। उन्होंने कहा कि जीवन के बाद भी किसी को जीवन देना सच्चे अर्थों में महादान है।
उन्होंने कहा कि मानव शरीर प्रकृति के पांच तत्वों से बना है और मृत्यु के बाद इन्हीं तत्वों में विलीन हो जाना है। ऐसे में यदि यही देह समाज और मानवता के काम आ सके तो इससे बड़ा पुण्य कार्य नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से अंगदान और देहदान का संकल्प लेने के साथ-साथ देह को स्वस्थ रखने का भी आह्वान किया, ताकि जीवन के बाद देहदान का संकल्प सार्थक रूप से पूरा हो सके।
राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने अंगदान और देहदान को समाज के प्रति समर्पण की भावना से जोड़ते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि “जीवन के बाद भी वह समाज के लिए क्या योगदान दे सकता है।” उन्होंने कहा कि समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने की आवश्यकता है और सरकार तथा समाज के सहयोग से इस दिशा में जागरूकता को और बढ़ाया जा सकता है।

डॉ. त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2023 में अंगदान के क्षेत्र में अपनाई गई आधिकारिक नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि अंगदान से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने दधीचि देहदान समिति के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट आलोक कुमार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि अंगदान और देहदान के लिए अपना जीवन समर्पित करने की उनकी भावना के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मिली सामाजिक समर्पण की प्रेरणा भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संघ का मूल विचार ही व्यक्ति को अपना जीवन समाज और देश के लिए समर्पित करने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने लोगों से अंगदान को लेकर भ्रम और भय दूर करने, परिवार के साथ इस विषय पर खुलकर बातचीत करने तथा अंगदान के संकल्प को सामाजिक चेतना का हिस्सा बनाने की अपील की। इस अवसर पर अंगदाताओं और उनके परिवारों के योगदान को भी नमन किया गया।
कार्यक्रम में दधीचि देहदान समिति के महामंत्री डॉ. विशाल चड्ढा, प्रचार प्रमुख अतुल गंगवार, आयोजन संयोजक वी.के. मोंगा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंजु प्रभा सहित देहदानियों के परिजन और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार और संसद टीवी के प्रस्तोता प्रतिबिम्ब शर्मा द्वारा लिखित एवं निर्देशित शॉर्ट फिल्म ‘राखी–जीवन की डोर’ का प्रदर्शन भी किया गया। फिल्म के माध्यम से अंगदान के महत्व और इसके जरिए किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन देने की मानवीय भावना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था कि अंगदान केवल मृत्यु के बाद की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता के प्रति जीवनभर की जिम्मेदारी और संवेदना का संकल्प है।

