बिहार: अक्सर कहा जाता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन रसूखदारों के घर तक पहुँचते-पहुँचते वे छोटे पड़ जाते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। सूबे में सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए चल रहे बुलडोजर अभियान की चपेट में खुद मुख्यमंत्री का तारापुर स्थित पुश्तैनी घर भी आ गया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने कार्रवाई रोकने के बजाय प्रशासन का साथ दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि सुंदर और विकसित बिहार बनाने के लिए नियम सबके लिए समान होंगे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने गृह क्षेत्र तारापुर में एक जनसभा के दौरान वो सच साझा किया, जिसने सबको दंग कर दिया। उन्होंने बताया कि महज एक हफ्ते पहले उन्हें रिपोर्ट मिली कि उनके अपने घर पर बुलडोजर चला है। अधिकारियों ने सूचना दी कि घर की सीढ़ी सरकारी जमीन के दायरे में आ रही है और उसे तोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के जनता के सामने कहा— ‘यह बात समझ लीजिए कि जब मेरा घर टूट सकता है, तो किसी और का घर कैसे बच सकता है? सरकारी जमीन पर जो भी बना है, उसे ध्वस्त होना ही होगा।‘ मुख्यमंत्री का यह बेबाक अंदाज बताता है कि वे व्यवस्था सुधारने के लिए खुद से शुरुआत करने में यकीन रखते हैं।
बिहार में बुलडोजर अभियान की शुरुआत नवंबर 2025 में एनडीए सरकार के गठन के तुरंत बाद हुई थी। समस्तीपुर से शुरू हुआ यह अभियान अब पटना, लखीसराय और सीतामढ़ी जैसे शहरों तक पहुँच चुका है। दरअसल, सड़कों पर बढ़ते अवैध कब्जों की वजह से बिहार के शहर जाम के झाम से बेहाल थे। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने ही अवैध कब्जों और जमीन माफियाओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस‘ की नीति अपनाई थी। उनका लक्ष्य स्पष्ट है—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के सपनों का विकसित और सुंदर बिहार बनाना।
इस पूरे अभियान के पीछे पटना हाईकोर्ट का कड़ा रुख भी शामिल है। कोर्ट के आदेश के बाद सम्राट चौधरी ने 31 जनवरी 2026 तक पूरे राज्य में विशेष ड्राइव चलाकर सड़कों को मुक्त करने का निर्देश दिया था। अब 1 अप्रैल 2026 से प्रशासन और भी अधिक योजनाबद्ध तरीके से सरकारी भूमि से कब्जे हटा रहा है। मुख्यमंत्री का खुद का घर टूटना इस बात का प्रमाण है कि बिहार में अब कानून का राज सबसे ऊपर है और विकास की राह में आने वाले हर अवरोध को बुलडोजर का सामना करना पड़ेगा।
सम्राट चौधरी का यह कदम उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो राजनीतिक रसूख के दम पर सरकारी संपत्तियों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। जब मुख्यमंत्री खुद अपने घर पर कार्रवाई को स्वीकार कर मिसाल पेश कर रहे हैं, तो प्रशासन के पास अब किसी को भी बख्शने का कोई कारण नहीं बचेगा।

