बिहार को आज अपना 24वां मुख्यमंत्री मिल गया है। सम्राट चौधरी ने सूबे की कमान संभाल ली है, लेकिन उनके सीएम बनते ही सियासी गलियारों में एक पुरानी चर्चा फिर से तेज़ हो गई है। यह चर्चा किसी नीति या योजना की नहीं, बल्कि सम्राट चौधरी और भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव के बीच हुए उस ‘वाकयुद्ध‘ की है, जिसने एक समय बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया था।
यह पूरा विवाद बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। उस समय खेसारी लाल यादव ने अपनी अभिनय की दुनिया से निकलकर छपरा की चुनावी पिच पर कदम रखा था। चुनावी माहौल अपनी चरम सीमा पर था और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी था। इसी दौरान एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने खेसारी लाल यादव पर सीधा तंज कसा। उन्होंने मंच से खेसारी को ‘नचनिया‘ कह दिया। सम्राट का यह बयान आग की तरह फैल गया और देखते ही देखते यह राजनीतिक जगत बनाम मनोरंजन जगत की लड़ाई बन गई।
सम्राट चौधरी की टिप्पणी पर खेसारी लाल यादव ने जो प्रतिक्रिया दी, उसने सबका दिल जीत लिया। खेसारी ने बेहद संयमित लहजे में कहा कि— ‘सम्राट चौधरी मेरे बड़े भाई जैसे हैं और मैं उनका सम्मान करता हूँ। मैं किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहता।‘ लेकिन साथ ही उन्होंने एक बड़ा सवाल भी दाग दिया। खेसारी ने पूछा कि— ‘अगर कलाकार होना गलत है या कलाकार ‘नचनिया’ है, तो फिर राजनीतिक दल चुनाव जीतने के लिए कलाकारों को टिकट क्यों देते हैं।‘ खेसारी के इस जवाब ने न केवल विवाद को शांत किया, बल्कि सम्राट चौधरी को भी बैकफुट पर धकेल दिया था।
वक्त का पहिया घूमा और आज सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। हालांकि उस चुनाव में खेसारी लाल यादव को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने साफ किया था कि हार-जीत से उनकी जनसेवा पर फर्क नहीं पड़ेगा। आज जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री की सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठे हैं, तो बिहार के कलाकार और उनके प्रशंसक यह उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री अब राज्य की कला और कलाकारों को उसी सम्मान से देखेंगे जिसके वे हकदार हैं।
राजनीति में बयान आते और जाते हैं, लेकिन कुछ विवाद इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं। सम्राट चौधरी अब पूरे बिहार के मुखिया हैं और खेसारी करोड़ों लोगों के दिलों के स्टार। उम्मीद है कि नई सरकार में कला और सियासत के बीच एक नया और सम्मानजनक रिश्ता बनेगा।

