बिहार की राजनीति में अब ‘कयासों’ का दौर खत्म होकर ‘कार्रवाई’ का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा सांसद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री आवास यानी 1 अणे मार्ग छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ट्रैक्टरों पर लदा सामान और 7 सर्कुलर रोड की ओर बढ़ती हलचल इशारा कर रही है कि बिहार की सत्ता में अब ‘बड़ा खेला’ संपन्न होने वाला है। सूत्रों की मानें तो 14 अप्रैल की तारीख बिहार के इतिहास में इस्तीफे की तारीख के रूप में दर्ज हो सकती है।
पटना के सबसे ताकतवर पते यानी ‘1 अणे मार्ग’ में इन दिनों सन्नाटा नहीं, बल्कि भारी हलचल है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास से फर्नीचर और अन्य निजी सामान को ट्रैक्टरों के जरिए 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास में भेजा जा रहा है। यह महज घर बदलना नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता बदलने का सबसे बड़ा संकेत है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज़ है कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं, जिसके बाद 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण संभव है। डेढ़ महीने से चल रहा सस्पेंस अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।
नीतीश कुमार का नया ठिकाना, यानी 7 सर्कुलर रोड, किसी किले से कम नहीं है। इस बंगले को खुद नीतीश कुमार ने अपनी देखरेख में तैयार करवाया है। यह आवास न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस है, बल्कि इसे भूकंपरोधी तकनीक से बनाया गया है ताकि यह तेज़ झटकों को भी झेल सके। बंगले के विशाल लॉन को खूबसूरती देने के लिए खास तौर पर कोलकाता से मखमली घास मंगाई गई है। अब तक इसे मुख्यमंत्री कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन अब यह नीतीश कुमार की नई राजनीतिक प्रयोगशाला बनेगा।
मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार का ठिकाना उन्हें एक दिलचस्प मोड़ पर ले आया है। 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होने के बाद नीतीश कुमार अब लालू प्रसाद यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। हालांकि वे राज्यसभा सांसद के रूप में दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहेंगे, लेकिन पटना में उनकी मौजूदगी यह बताती है कि वे बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होने वाले हैं। सवाल अब यह है कि उनके इस्तीफे के बाद 15 तारीख को राजतिलक किसका होगा? क्या सम्राट चौधरी के सिर सजेगा ताज या एनडीए कोई नया चौंकाने वाला नाम सामने लाएगा?
नीतीश कुमार का सामान शिफ्ट होना सिर्फ एक घर का बदलाव नहीं, बल्कि बिहार की 20 साल पुरानी कार्यशैली का बदलाव है। 14 और 15 अप्रैल की तारीखें बिहार के भविष्य की नई इबारत लिखेंगी।

