बिहार की 18वीं विधानसभा का पहला सत्र हंगामेदार रहा। सत्र के चौथे दिन विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए, और इन हमलों के केंद्र में रहे राज्य के नए गृह मंत्री सम्राट चौधरी। विपक्ष ने उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ कहकर संबोधित किया, जिसके जवाब में गृह मंत्री ने सदन में मोर्चा संभाला और विपक्ष के हर सवाल का करारा जवाब दिया।
सदन में विपक्ष ने सम्राट चौधरी पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर ‘बुलडोजर बाबा’ बनने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि सरकार अतिक्रमण हटाने की आड़ में गरीबों के घर तोड़ रही है। इस तंज पर सम्राट चौधरी ने न केवल जवाब दिया, बल्कि अपनी पहचान भी स्पष्ट की। गृह मंत्री ने कहा, “मैं साफ कर दूं कि मेरा नाम सम्राट चौधरी है और मैं इसी नाम से जाना जाता हूँ।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल अतिक्रमण और माफियाओं के खिलाफ चल रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गरीबों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन जो भी गलत करेगा, वह कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।
इस दौरान कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने पुलिस प्रशासन पर एक गंभीर आरोप लगाया। विधायक ने कहा कि राज्य में एफआईआर दर्ज करने के लिए घूस लिया जाता है। मनोहर सिंह, जो खुद डीआईजी के पद पर रहकर पुलिस विभाग में एक लंबा अनुभव रखते हैं, उनके इस आरोप ने सदन को गरमा दिया। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने तुरंत इसका जवाब दिया। उन्होंने कांग्रेस विधायक को अपना अनुभव साझा करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि अगर कोई भी ऐसी घटना सामने आती है जहाँ थानेदार घूस मांगे या एफआईआर दर्ज न करे, तो तुरंत शिकायत की जाए। नीतीश कुमार की सुशासन की सरकार उस आरोपी को तुरंत बर्खास्त कर कार्रवाई करेगी।
18वीं विधानसभा के पहले सत्र में सरकार और विपक्ष दोनों के ही तेवर साफ दिखाई दे रहे हैं। जहाँ विपक्ष ‘बुलडोजर बाबा’ और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर सरकार को घेर रहा है, वहीं गृह मंत्री सम्राट चौधरी साफ कर चुके हैं कि माफियाओं और गलत काम करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी। सुशासन और भ्रष्टाचार पर यह टकराव आगे भी सदन में देखने को मिल सकता है।

