पट्टीकल्याणा (समालखा), 13 मार्च 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने सौ साल पूरे करने की दहलीज पर है। इस ऐतिहासिक मोड़ पर आज हरियाणा के पट्टीकल्याणा में संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक का विधिवत शुभारंभ हुआ। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर इस महामंथन की शुरुआत की। 1400 से अधिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में संघ ने न केवल अपने विस्तार के आंकड़े पेश किए, बल्कि समाज में बड़े बदलाव के लिए ‘पंच परिवर्तन‘ का रोडमैप भी सामने रखा।
प्रतिनिधि सभा के शुभारंभ पर सह सरकार्यवाह सी. आर. मुकुंद ने जो आंकड़े पेश किए, वे संघ के निरंतर बढ़ते प्रभाव की गवाही दे रहे हैं। पिछले एक वर्ष में संघ की शाखाओं में भारी बढ़ोतरी हुई है। अब देश के 55 हजार से अधिक स्थानों पर लगभग 89,000 शाखाएं संचालित हैं। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संघ ने ‘गृह संपर्क अभियान‘ के जरिए अब तक देश के 10 करोड़ घरों और करीब 4 लाख गांवों तक सीधी पहुंच बनाई है। चौंकाने वाली बात यह है कि केरल जैसे राज्य में 55 हजार मुस्लिम और 54 हजार ईसाई परिवारों ने स्वयंसेवकों का आत्मीय स्वागत किया, जो संघ की सर्वव्यापी स्वीकार्यता का संकेत है।
संघ का यह शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का वर्ष है। इसके लिए संघ ने ‘पंच परिवर्तन‘ का लक्ष्य रखा है, जिसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का गौरव, परिवार व्यवस्था का संरक्षण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। देशभर में अब तक 37,000 से अधिक हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें साढ़े तीन करोड़ लोगों ने सहभागिता की है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत खुद समाज के साथ सीधा संवाद कर रहे हैं। हाल ही में चार महानगरों में उन्होंने नागरिकों के 1000 से अधिक प्रश्नों के उत्तर देकर 20 घंटे से ज्यादा समय तक संवाद स्थापित किया।
बैठक की शुरुआत में उन विभूतियों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने समाज जीवन में अमूल्य योगदान दिया। इनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल, अभिनेता धर्मेंद्र देओल, और पर्यावरणविद डॉ. माधव गाडगिल जैसी हस्तियां शामिल रहीं। प्रेस वार्ता में संघ ने मणिपुर में बहाल होती शांति पर संतोष जताया, तो वहीं पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिन्दुओं की स्थिति पर गहरी चिंता भी व्यक्त की। संघ ने साफ किया कि उसका उद्देश्य समाज की सज्जन शक्ति को एकत्रित कर राष्ट्र निर्माण के कार्य को 2026 तक और अधिक गति देना है।
संघ की यह प्रतिनिधि सभा आने वाले तीन दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगा सकती है। 1400 प्रतिनिधियों का यह जमावड़ा अगले सौ साल के लिए संघ की वैचारिक और संगठनात्मक दिशा तय करने जा रहा है।

