किशनगंज: क्या बिहार का एक बार फिर बंटवारा होने वाला है? क्या सीमांचल को एक अलग राज्य बनाने की तैयारी चल रही है? इन सवालों ने बिहार की सियासत में भूचाल ला दिया है। लेकिन इस बीच पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने दिल्ली से पटना तक हलचल मचा दी है। पप्पू यादव ने दो-टूक कहा है कि जब तक वो ज़िंदा हैं, बिहार का बंटवारा नहीं होने देंगे। उन्होंने सीमांचल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और यहाँ तक कह दिया कि ‘सीमांचल कोई बैंकॉक नहीं है‘।
किशनगंज के पोठिया में एक कार्यक्रम के बाद पप्पू यादव का रौद्र रूप देखने को मिला। सीमांचल को अलग राज्य बनाने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार पहले ही झारखंड, उड़ीसा, बंगाल और छत्तीसगढ़ के अलग होने का दंश झेल चुका है। अब बिहार को और अधिक कमज़ोर करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार को ललकारते हुए कहा कि अगर विभाजन की दिशा में कोई भी कदम उठाया गया, तो वह इसका पुरजोर विरोध करेंगे। पप्पू यादव के मुताबिक, बिहार के गरीब, पिछड़े और दलित पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में बंटवारा समाधान नहीं बल्कि समस्या होगा।
हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान पप्पू यादव के सुर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति काफी नरम दिखे। उन्होंने नीतीश कुमार की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संतुलित तरीके से बिहार के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। हालांकि, उन्होंने राज्य की कड़वी सच्चाई—पलायन और गरीबी पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि आज भी बिहार का युवा बाहर जाने को मजबूर है, लेकिन इसका हल राज्य को बांटना नहीं, बल्कि उसे विकसित करना है।
पप्पू यादव ने भविष्य की राजनीति को लेकर भी एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ़ कहा कि आने वाले समय में बिहार को ऐसी सरकार चाहिए जो समाज में नफरत फैलाने या ‘बुलडोजर‘ चलाने के बजाय गरीबों के आंसू पोंछे। उन्होंने सामाजिक सौहार्द और जनता के बीच विश्वास बहाली को सबसे बड़ी ज़रूरत बताया। पप्पू यादव का यह बयान साफ़ करता है कि वे सीमांचल की राजनीति में ‘बंटवारे‘ के कार्ड को पूरी तरह फेल करने के मूड में हैं और खुद को पूरे बिहार के नेता के रूप में पेश कर रहे हैं।
पप्पू यादव ने ‘बैंकॉक‘ वाले बयान से साफ़ कर दिया है कि सीमांचल कोई सैर-सपाटे की जगह नहीं है जिसे राजनीति की बिसात पर जब चाहे अलग कर दिया जाए। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और अन्य राजनीतिक दल पप्पू यादव के इस कड़े रुख पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

