पप्पू यादव पर दोहरा प्रहार! गिरफ्तारी के बाद अब दर्ज हुई नई FIR, सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप

पटना: पप्पू यादव की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। 31 साल पुराने केस में गिरफ्तारी देने से इनकार करना और पुलिस से उलझना सांसद को भारी पड़ गया है। पटना के बुद्धा कॉलोनी थाने में उनके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

शुक्रवार की रात, पटना का पॉश इलाका उस वक्त अखाड़ा बन गया जब भारी पुलिस बल पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार करने उनके दरवाजे पर पहुँचा। लेकिन जैसे ही पुलिस ने वारंट दिखाया, सांसद बिफर पड़े। कैमरों के सामने उन्होंने सीधे तौर पर एनकाउंटर और हत्या की आशंका जता दी। पप्पू यादव ने दो टूक कहा— रात में इनके साथ थाने नहीं जाऊंगा, ये लोग मुझे मरवा देंगे। आपको पास कोर्ट का कोई ऑर्डर नहीं है। घंटों चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद सिटी एसपी को खुद मोर्चा संभालना पड़ा, तब कहीं जाकर सांसद की गिरफ्तारी मुमकिन हुई।

पुलिस की कार्रवाई में रुकावट डालना और समर्थकों का हंगामा अब सांसद के लिए नई मुसीबत बन गया है। बुद्धा कॉलोनी थाने में पप्पू यादव और उनके समर्थकों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद अचानक सांसद की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें पहले IGMS और फिर PMCH ले जाया गया। पुलिस की इस सख्ती ने अब पप्पू यादव के समर्थकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।

पप्पू यादव का कानूनी संघर्ष अब उनके राजनीतिक भविष्य पर भी साया डाल रहा है। 1994 में पहली बार सांसद बनने के दौरान शुरू हुआ यह विवाद आज 31 साल बाद कुर्की और गिरफ्तारी तक पहुँच गया है। फिलहाल पप्पू यादव अस्पताल में पुलिस की निगरानी में हैं। सोमवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है, जिस पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हैं।

कानून के हाथ लंबे होते हैं, ये कहावत पप्पू यादव के मामले में सच साबित हो रही है। 31 साल पुराने केस ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचाया, तो ताजा हंगामे ने उनके खिलाफ एक और केस की फाइल खोल दी है। सोमवार की सुनवाई ये तय करेगी कि पप्पू यादव को राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।

 

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