‘ओ रोमियो’ मूवी रिव्यू: शाहिद कपूर का ‘उस्त्रा’ अवतार देख भूल जाएंगे ‘कबीर सिंह’, तृप्ति डिमरी के साथ जमी जबरदस्त केमिस्ट्री

शेक्सपियर की कहानियों को हिंदुस्तानी रंग देने वाले मास्टर डायरेक्टर विशाल भारद्वाज एक बार फिर लौट आए हैं। इस बार उनके पिटारे में है— ओ रोमियो। एक खतरनाक गैंगस्टर उस्त्रा‘, एक हिम्मतवाली लड़की अफशांऔर अंडरवर्ल्ड की काली गलियां।

फिल्म की कहानी घूमती है उस्त्राके इर्द-गिर्द, जिसे शाहिद कपूर ने निभाया है। उस्त्रा एक ऐसा कॉन्ट्रैक्ट किलर है जिसकी दुनिया में सिर्फ मौत का सन्नाटा है। लेकिन जब उसकी जिंदगी में अफशांयानी तृप्ति डिमरी की एंट्री होती है, तो पत्थर दिल उस्त्रा के अंदर जज्बातों का सैलाब उमड़ पड़ता है। विशाल भारद्वाज ने इस रिश्ते को पहली नजर के प्यारजैसा नहीं, बल्कि दो टूटे हुए दिलोंके सुकून जैसा दिखाया है। यह मोहब्बत खूबसूरत है, लेकिन बहुत खतरनाक भी, क्योंकि इसके पीछे अंडरवर्ल्ड की पॉलिटिक्स का साया है।

एक्टिंग की बात करें तो शाहिद कपूर इस फिल्म की रीढ़ हैं। कमीनेऔर हैदरके बाद उस्त्रा के रोल में शाहिद ने जो तीव्रता दिखाई है, वो काबिल-ए-तारीफ है। वहीं तृप्ति डिमरी ने अफशां के किरदार में एक ऐसी हिम्मत भरी है जो खामोश होकर भी डराती है। सपोर्टिंग कास्ट में अविनाश तिवारी का जलालवाला अवतार रोंगटे खड़े कर देता है, तो नाना पाटेकर की गूँजती आवाज़ हर फ्रेम को वजन देती है। विक्रांत मैसी और तमन्ना भाटिया के छोटे लेकिन असरदार रोल कहानी में जबरदस्त ट्विस्ट लाते हैं।

तकनीकी तौर पर फिल्म एक विजुअल ट्रीटहै। लाइट और शैडो का खेल उस्त्रा की काली जिंदगी को बखूबी दिखाता है। हालांकि, फिल्म की लंबाई और सेकंड हाफ के उलझे हुए सबप्लॉट्स दर्शकों को थोड़ा थका सकते हैं। दिशा पटानी का ग्लैमर और पुराने दिग्गजों की मौजूदगी फिल्म के भारीपन को बैलेंस करती है। विशाल भारद्वाज की ओ रोमियोसिर्फ एक गैंगस्टर फिल्म नहीं है, बल्कि जुर्म की दुनिया में खोई हुई मासूमियत की तलाश है। अगर आपको इंटेंस क्राइम ड्रामा और दिल छू लेने वाली लव स्टोरीज पसंद हैं, तो ओ रोमियोआपके लिए ही बनी है।

 

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