पटना, बिहार: बिहार की राजनीति में इस वक्त जो हो रहा है, उसे एक युग का अंत और नए दौर का आगाज कहा जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा जा रहे हैं, लेकिन जाते-जाते उन्होंने यह साफ कर दिया है कि उनकी कुर्सी का असली हकदार कौन होगा। पिछले कई दिनों से चर्चा थी कि बीजेपी का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, क्या मोदी-शाह फिर से किसी चौंकाने वाले चेहरे को सामने लाएंगे? लेकिन सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है, वो ये है कि बिहार का अगला ‘सम्राट‘ कोई और नहीं, बल्कि मौजूदा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी होंगे।
बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच जेडीयू के कद्दावर नेता ललन सिंह ने एक ऐसा बयान दिया जिसने सारी अटकलों पर विराम लगा दिया। ललन सिंह ने साफ़ कहा कि नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी कौन होगा, यह खुद नीतीश ही तय करेंगे। उनके इस दावे में दम इसलिए भी है क्योंकि सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन भरने से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने अपनी शर्त रख दी थी। नीतीश ने साफ कर दिया था कि वे सम्राट चौधरी को ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहते हैं, और खबर है कि अमित शाह ने इस पर अपनी सहमति भी दे दी है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक भावुक मोड़ तब आया जब 4 मार्च को नीतीश कुमार के परिवार के सदस्य उन्हें सीएम पद न छोड़ने के लिए मनाने पहुँचे। लेकिन नीतीश अपने फैसले पर अडिग थे। परिवार के एक करीबी सदस्य के मुताबिक, नीतीश जी ने कहा कि— ‘वे सम्राट चौधरी को अगला सीएम बनवा रहे हैं, सम्राट अपनी ही लड़का है और ठीक से काम करेगा।‘ यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार सम्राट चौधरी के लिए ढाल बने हों। कुछ महीने पहले जब बीजेपी आलाकमान सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम पद से हटाने का मन बना चुका था, तब भी नीतीश ने अपने दूतों के जरिए संदेश भिजवाया था कि उन्हें डिप्टी सीएम के तौर पर सिर्फ सम्राट ही चाहिए।
सवाल ये है कि जो बीजेपी यूपी और मध्य प्रदेश में चौंकाने वाले चेहरे लाती है, वो बिहार में नीतीश की बात क्यों मान रही है? जवाब है ‘सोशल इंजीनियरिंग‘। बीजेपी जानती है कि केंद्र में सरकार चलाने के लिए उसे जेडीयू के सांसदों का साथ चाहिए। साथ ही, बिहार के अति पिछड़े और कुशवाहा वोट बैंक पर नीतीश की पकड़ आज भी मजबूत है। अगर नीतीश नाराज हुए तो बीजेपी का 2029 का सपना बिखर सकता है। इसीलिए, फिलहाल बिहार में मोदी-शाह की नहीं, बल्कि नीतीश की पसंद ही चलेगी। सम्राट चौधरी का सीएम बनना अब लगभग तय माना जा रहा है।
नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के सदस्य चुने जाएंगे, लेकिन उनके उत्तराधिकारी की ताजपोशी 10 अप्रैल के आसपास होगी। खुद नीतीश कुमार एनडीए विधायक दल की बैठक में अपने वारिस के नाम का औपचारिक ऐलान करेंगे। बिहार की राजनीति में यह बदलाव क्या नए समीकरण पैदा करेगा, इस पर हमारी नज़र बनी रहेगी।

