बिहार की राजनीति में अनंत सिंह एक ऐसा नाम है, जिनकी चर्चा कभी उनके दबदबे के लिए होती है, तो कभी उनकी जेल यात्राओं के लिए। लेकिन इस बार खबर उनके वोट की ताकत से जुड़ी है। दुलारचंद हत्याकांड में पटना के बेउर जेल में बंद मोकामा विधायक अनंत सिंह 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में वोट डालने विधानसभा पहुंचेंगे। अदालत ने उन्हें वोटिंग की विशेष अनुमति दे दी है।
मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के लिए जेल से निकलकर सदन तक का सफर नया नहीं है। इससे पहले जब विधानसभा सत्र के दौरान शपथ लेनी थी, तब भी वे जेल से ही आए थे। अब एक बार फिर, राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाली वोटिंग में वे अपना वोट डालेंगे। पुलिस कस्टडी में उन्हें विधानसभा लाया जाएगा, जहाँ वे मताधिकार का प्रयोग करने के बाद सीधे वापस जेल भेज दिए जाएंगे। शुक्रवार को मिली कोर्ट की इजाजत ने जेडीयू खेमे में उत्साह भर दिया है, क्योंकि अनंत सिंह अब अधिकारिक तौर पर जेडीयू के विधायक हैं।
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में इस बार मुकाबला दिलचस्प है। कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें एनडीए ने अपने पांचों प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इस बार खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं और उन्होंने जेडीयू कोटे से अपना नामांकन भरा है। उनके साथ बीजेपी के नितिन नबीन, शिवेश कुमार, जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा भी मैदान में हैं। वहीं महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने एडी सिंह पर फिर से भरोसा जताया है। एनडीए के पास 202 विधायकों का भारी-भरकम समर्थन है, ऐसे में अनंत सिंह का वोट रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आंकड़ों के खेल में फिलहाल एनडीए का पलड़ा भारी दिख रहा है। महागठबंधन की स्थिति विधानसभा में उतनी मजबूत नहीं है कि वह सभी गणित को बदल सके, लेकिन छठे उम्मीदवार के रूप में एडी सिंह की मौजूदगी ने वोटिंग की नौबत ला दी है। अगर आरजेडी ने अपना उम्मीदवार वापस नहीं लिया, तो 16 मार्च को हर एक वोट की कीमत बढ़ जाएगी। यही वजह है कि जेल में बंद विधायकों को भी कस्टडी में बुलाकर वोट डलवाने की तैयारी की गई है। अनंत सिंह की यह ‘जेल-टू-विधानसभा’ यात्रा बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना और अनंत सिंह का जेल से आकर वोट डालना—बिहार की राजनीति में ‘पॉवर प्ले’ का एक नया अध्याय है। 16 मार्च को होने वाली यह वोटिंग न केवल राज्यसभा के नए चेहरे तय करेगी, बल्कि बिहार में आने वाले सत्ता परिवर्तन की नींव भी रखेगी।

