दिल्ली, जो सर्वधर्म समभाव और विविध संस्कृतियों का संगम है, वहाँ आज एक ऐसी मांग उठी है जिसने प्रशासन के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। भगवान महावीर देशना फाउंडेशन के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन ने दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत तमाम बड़े अधिकारियों को पत्र लिखकर एक महत्वपूर्ण आग्रह किया है। मांग यह है कि दिल्ली के सभी धार्मिक स्थलों—चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद हो, गुरुद्वारा हो या चर्च—उनके 500 मीटर के दायरे में मांस और मदिरा की दुकानों को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए।
भगवान महावीर देशना फाउंडेशन के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन का मानना है कि दिल्ली देश की राजधानी होने के नाते पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। यहाँ प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था के केंद्रों पर पहुँचते हैं। लेकिन, कई क्षेत्रों में इन पवित्र स्थलों के बिल्कुल पास मांस और मदिरा की दुकानें संचालित हो रही हैं। मनोज कुमार जैन के अनुसार, इन दुकानों से निकलने वाली गंदगी, दुर्गंध और अस्वच्छता न केवल पर्यावरण को दूषित करती है, बल्कि वहां आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी चोट पहुँचाती है। उन्होंने इसे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया है कि ऐसे स्थलों की गरिमा और शांति हर हाल में बरकरार रहे।
फाउंडेशन ने उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार से आग्रह किया है कि दिल्ली में उपासना स्थलों के 500 मीटर के दायरे को ‘पवित्र क्षेत्र‘ घोषित किया जाए। इस दायरे में मांस की बिक्री और मदिरा की दुकानों के संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए। जहाँ ऐसी दुकानें पहले से चल रही हैं, उन्हें बंद कराने या स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए जाएँ। मनोज कुमार जैन ने दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा और महापौर सरदार राजा इक़बाल सिंह से भी इस जनभावना से जुड़े विषय पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। उनका तर्क है कि इससे राजधानी में सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना और अधिक मजबूत होगी।
धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने की यह मांग दिल्ली की नई सरकार और एमसीडी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। एक तरफ जहाँ यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मुद्दा है, वहीं दूसरी तरफ लाइसेंस और व्यापारिक नियम भी प्रशासन के सामने होंगे। हालांकि, मनोज कुमार जैन ने विश्वास जताया है कि अगर इस पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो यह दिल्ली की ‘धार्मिक गरिमा‘ को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा। अब देखना यह है कि दिल्ली का शीर्ष नेतृत्व इस संवेदनशील मांग पर क्या रुख अपनाता है।

