नई दिल्ली, 15 मार्च 2026 – पल्स ऑफ पॉजिटिविटी द्वारा ली मेरिडियन, नई दिल्ली में हेल्थ एंड वेलनेस समिट 2026 का सफल आयोजन किया गया। एक दिवसीय इस समिट में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और वेलनेस प्रैक्टिशनर्स ने भाग लिया तथा वर्तमान समय में भारत की प्रमुख स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर सार्थक संवाद के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में दिल्ली के माननीय महापौर श्री राजा इक़बाल सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर “हेल्थ चौपाल” नामक एक महत्वपूर्ण पहल का शुभारंभ भी किया गया, जिसे एक सामुदायिक मंच के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना, निवारक स्वास्थ्य उपायों को प्रोत्साहित करना और वेलनेस से जुड़ी पहलों में जनभागीदारी को मजबूत करना है।
यह समिट खुले विचार-विमर्श और गंभीर चर्चा के मंच के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें आज के समय में समाज के सामने मौजूद प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों पर विचार किया गया। इनमें मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां, महिलाओं का स्वास्थ्य, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से स्वास्थ्य संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य तंत्र केवल बीमारियों के उपचार तक सीमित न रहकर रोकथाम, जागरूकता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य कल्याण पर भी केंद्रित होना चाहिए।
समिट के पहले सत्र “मेंटल हेल्थ और इमोशनल वेल-बीइंग” में मानसिक स्वास्थ्य को समग्र स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा मानते हुए इसकी बढ़ती महत्ता पर चर्चा की गई। दूसरे सत्र “लाइफस्टाइल डिज़ीज़ और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर” में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ और स्वस्थ दैनिक आदतों के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के उपायों पर विचार किया गया। वहीं “महिलाओं का स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु कल्याण” विषय पर आयोजित विशेष सत्र में महिलाओं के स्वास्थ्य, मातृ देखभाल और प्रारंभिक बाल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तथा सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया गया।
वेलनेस पहलों के महत्व पर अपने विचार साझा करते हुए दिल्ली के माननीय महापौर श्री राजा इक़बाल सिंह ने कहा,
“जीवन में संतुलन बनाए रखना और संतोष तथा प्रसन्नता के साथ जीना समग्र मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। आज यह जरूरी है कि हम स्वस्थ जीवन के इन सरल लेकिन प्रभावशाली सिद्धांतों को स्वयं को याद दिलाएं। इस प्रकार के हेल्थ और वेलनेस समिट नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए, क्योंकि ये लोगों को एक ऐसा मंच प्रदान करते हैं जहां वे अपने स्वास्थ्य पर विचार कर सकें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित हों।”
इस पहल के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए पल्स ऑफ पॉजिटिविटी के एडिटर-इन-चीफ रियर एडमिरल कपिल गुप्ता, वीएसएम (सेवानिवृत्त) ने कहा,
“आज स्वास्थ्य से जुड़े संवाद को रोकथाम, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी की संस्कृति की ओर आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। इसी सोच के साथ इस हेल्थ एंड वेलनेस समिट की परिकल्पना की गई है, ताकि नीति-निर्माता, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और वेलनेस प्रैक्टिशनर्स भारत में स्वास्थ्य के भविष्य पर सार्थक संवाद कर सकें। जब ज्ञान, नीति की समझ और सामुदायिक जागरूकता एक साथ आती है, तो एक स्वस्थ और सशक्त समाज की मजबूत नींव तैयार होती है।”
समिट का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ, जिसमें सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 216 प्राप्त करने वाले श्री तुषार चौहान सहित अन्य विशिष्ट वक्ताओं ने भाग लिया और दिनभर चली चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक रवि पाराशर ने स्वास्थ्य व्यवस्था के व्यापक परिप्रेक्ष्य पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र और राज्य दोनों का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकारें स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील हैं और शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर तेजी से काम किया जा रहा है। हालांकि देश की विशाल आबादी को देखते हुए आदर्श स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में अभी समय लगेगा, लेकिन सकारात्मक प्रयास लगातार जारी हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं पर रोजमर्रा का बोझ कम करने के लिए केवल चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति सामुदायिक जागरूकता को भी तेजी से बढ़ाना आवश्यक है। जन-स्वास्थ्य नीतियों की प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े और स्वस्थ जीवनशैली के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए।
रवि पाराशर ने यह भी कहा कि यदि सरकारें और समाज मिलकर शहरीकरण के साथ-साथ वनीकरण, वायु और जल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण, नदियों और जल स्रोतों की स्वच्छता, वर्षा जल प्रबंधन, कचरा निस्तारण की सुदृढ़ व्यवस्था, खाद्य पदार्थों में मिलावट पर कठोर रोक और जैविक खेती के विस्तार जैसे कदमों पर गंभीरता से काम करें, तो इससे विशेष रूप से मध्य और निम्नवर्गीय आबादी को बार-बार होने वाली बीमारियों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

