दिल्ली में 7-8 मार्च को होगा महिलाओं का ऐतिहासिक ‘भारती’ सम्मेलन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और सीएम रेखा गुप्ता कार्यक्रम में होंगी शामिल

दिल्ली: राजधानी दिल्ली में अगले हफ्ते महिलाओं का एक बहुत बड़ा जमावड़ा होने जा रहा है। 7 और 8 मार्च को विज्ञान भवन में भारती – नारी से नारायणीनाम का एक नेशनल लेवल का सम्मेलन होगा। राष्ट्र सेविका समिति और शरण्या जैसे संगठनों की ओर से आयोजित इस प्रोग्राम में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता भी शामिल होंगी।

दिल्ली में शनिवार को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बड़े आयोजन की जानकारी दी गई। राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख सीता गायत्री ने साफ कहा कि ये सम्मेलन सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि देश की महिलाओं की ताकत को एकजुट करने का एक बड़ा संकल्प है। उन्होंने एक दिलचस्प बात कही—कि ये संगठन पश्चिमी देशों वाले फेमिनिज्ममें यकीन नहीं रखता, जहाँ पुरुषों से मुकाबला या संघर्ष की बात होती है। समिति का मानना है कि औरत और मर्द एक ही रोशनी की दो किरणें हैं और समाज का भला तभी होगा जब दोनों मिलकर आगे बढ़ेंगे।

आपको बता दें कि राष्ट्र सेविका समिति के 90 साल पूरे हो चुके हैं। आज देशभर में इसकी 4500 शाखाएं चल रही हैं और करीब 2000 सेवा केंद्र शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इस सम्मेलन के जरिए अब महिलाओं को साइलेंट पावरसे बदलकर लीडरशिपके रोल में लाने की तैयारी है। भारतीय विद्वत परिषद की सचिव डॉ. वी. शिवानी ने बताया कि दो दिनों तक चलने वाली इस चर्चा में विद्या, शक्ति, संस्कृति और चेतना जैसे 8 बड़े मुद्दों पर बात होगी।

इस महा-सम्मेलन में सिर्फ चर्चा ही नहीं होगी, बल्कि महिला सांसदों और यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर्स के खास पैनल भी बैठेंगे। साध्वी ऋतंभरा जैसी आध्यात्मिक हस्तियां और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व अन्नपूर्णा देवी भी इस मंथन का हिस्सा बनेंगे। यहाँ से जो सुझाव निकलकर आएंगे, उन्हें भारत सरकार के विभागों को भेजा जाएगा ताकि महिलाओं के लिए नई नीतियां बनाई जा सकें। शरण्या की अध्यक्ष अंजू आहूजा का कहना है कि नारी को नारायणीका दर्जा दिलाना ही इस पूरे इवेंट का असली मकसद है।

कुल मिलाकर 7 और 8 मार्च को दिल्ली का विज्ञान भवन महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखेगा। देखना होगा कि इस मंथन से महिलाओं की आत्मनिर्भरता के लिए कौन से नए रास्ते खुलते हैं।

 

 

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