नई दिल्ली: देश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों के लिए एक नया कानून लागू हुआ है—UGC एक्ट 2026। इसका मकसद कैंपस से भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना है, लेकिन लागू होते ही इस पर बवाल शुरू हो गया है। एक तरफ इसे पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए बड़ी जीत बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ ‘जनरल कैटेगरी‘ के छात्र इसे गलत बता रहे हैं।
यूजीसी ने इस महीने नए नियम लागू किए हैं, जिनका सीधा मकसद है कैंपस में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना। इस नए कानून की सबसे खास बात ये है कि इसमें पहली बार OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भी शामिल किया गया है। पहले ये नियम सिर्फ SC और ST छात्रों के लिए थे, लेकिन अब OBC छात्र और स्टाफ भी किसी भी तरह के भेदभाव की शिकायत सीधे कर सकेंगे। इसके लिए हर कॉलेज में एक ‘इक्विटी सेंटर‘ और एक खास कमेटी बनाना जरूरी कर दिया गया है।
कानून के आते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र संगठन इस कानून को ‘एकतरफा‘ बता रहे हैं। विरोध की सबसे बड़ी वजह ये है कि भेदभाव रोकने के लिए जो कमेटियां बनेंगी, उनमें SC, ST, OBC और महिलाओं का होना तो जरूरी है, लेकिन जनरल कैटेगरी के किसी सदस्य का जिक्र नहीं है। छात्रों का कहना है कि इससे जांच निष्पक्ष नहीं होगी। दूसरी बड़ी चिंता ये है कि अगर कोई ‘झूठी शिकायत‘ करता है, तो उस पर कार्रवाई का कोई सख्त नियम नहीं रखा गया है।
यूजीसी ने साफ कर दिया है कि अगर कोई यूनिवर्सिटी इन नियमों को नहीं मानती, तो उसकी सरकारी मदद (फंड) रोकी जा सकती है और बहुत बड़े मामले में उसकी मान्यता तक छीनी जा सकती है। इसी सख्ती की वजह से कई छात्र संगठनों का मानना है कि इससे कैंपस का माहौल खराब होगा और छात्रों के बीच आपसी भरोसा कम हो जाएगा। मामला अब कोर्ट तक भी पहुँच गया है, जहाँ इसे समानता के अधिकार के खिलाफ बताया जा रहा है।
दूसरी ओर, सरकार और यूजीसी का मानना है कि कैंपस में सभी को बराबर का हक दिलाने के लिए ऐसे कड़े नियमों की बहुत जरूरत थी। उनका कहना है कि पुराने नियमों में कई कमियां थीं जिन्हें अब दूर कर दिया गया है ताकि किसी भी वर्ग का छात्र खुद को अकेला महसूस न करे।
कैंपस अब सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि एक नई कानूनी बहस का अड्डा बन गए हैं। यूजीसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो भेदभाव मिटाने के चक्कर में कहीं आपसी दूरियां न बढ़ा दे। फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या सरकार इन नियमों में कुछ बदलाव करेगी या विरोध ऐसे ही चलता रहेगा।

