पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और फील्ड में काम कर रहे मीडियाकर्मियों की बढ़ती चुनौतियों के बीच, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) ने अपने 54वें स्थापना दिवस पर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की मेजबानी में आयोजित इस समारोह में न केवल मीडिया की वर्तमान स्थिति पर मंथन हुआ, बल्कि पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए ‘जर्नलिस्ट्स प्रोटेक्शन फोरम‘ के गठन का ऐलान भी किया गया। वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर जंतर मंतर रोड पर जुटे पत्रकारों ने एकजुटता का संकल्प लिया।
दिल्ली के 7, जंतर मंतर रोड पर दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (DJA) द्वारा आयोजित इस समारोह की शुरुआत वसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस मौके पर ‘मीडिया की चुनौतियों‘ विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता डीजेए के अध्यक्ष राकेश थपलियाल ने की। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे डिजिटल युग में पत्रकारिता का स्वरूप बदल रहा है और पत्रकारों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बनती जा रही है।
समारोह में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबद्ध एनयूजे (इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने ‘जर्नलिस्ट्स प्रोटेक्शन फोरम’ के गठन की घोषणा की। यह फोरम जर्नलिस्ट्स वैलफेयर फाउंडेशन के तत्वाधान में काम करेगा। रास बिहारी ने कहा कि पत्रकारों के लिए किसी विशेष कानून की कमी के कारण देशभर में पत्रकारों के खिलाफ घटनाएं बढ़ रही हैं। यह नया फोरम इन चुनौतियों की समीक्षा करेगा और पत्रकारों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए एक ढाल की तरह काम करेगा।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ सदस्यों और पदाधिकारियों का सम्मान किया गया। एनयूजे आई अध्यक्ष रास बिहारी और डीजेए अध्यक्ष राकेश थपलियाल ने संगठन के वरिष्ठ सदस्यों को शॉल और कलम भेंट कर सम्मानित किया। संगोष्ठी को प्रमोद कुमार सिंह, मनोहर सिंह, अमलेश राजू और प्रतिभा शुक्ल जैसे दिग्गजों ने भी संबोधित किया, जिन्होंने पत्रकारिता की गरिमा और सुरक्षा को सर्वोपरि बताया।

