विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल अब हार के कारणों को तलाशने और भविष्य की बिसात बिछाने में जुट गई है। शुक्रवार को पटना में तेजस्वी यादव ने अपने सांसदों के साथ लंबी बैठक की, जिसमें बजट सत्र की रणनीति और राज्यव्यापी यात्रा को लेकर चर्चा की गई। लेकिन इस बैठक के बीच लालू परिवार की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सतह पर आ गई है। तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य ने पार्टी की इस समीक्षा को दिखावा बताते हुए उन चेहरों पर निशाना साधा है, जो तेजस्वी के सबसे करीब माने जाते हैं।
आरजेडी मुख्यालय में शुक्रवार को करीब 3 घंटे तक हलचल रही। तेजस्वी यादव ने अपने सांसदों के साथ बैठक कर यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अब आक्रामक रुख अपनाएगी। संसद से लेकर विधानसभा के बजट सत्र तक, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग प्रमुख मुद्दा होगी। सांसद सुधाकर सिंह के मुताबिक, बजट सत्र समाप्त होते ही तेजस्वी यादव एक बार फिर जनता के बीच होंगे और पूरे बिहार की यात्रा करेंगे। पार्टी अब संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी में है, लेकिन इसी बीच परिवार से आई एक प्रतिक्रिया ने सबका ध्यान भटका दिया।
जैसे ही तेजस्वी ने समीक्षा बैठक की जानकारी साझा की, उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने बिना किसी का नाम लिए तेजस्वी और उनके करीबी लोगों पर तीखा हमला बोल दिया। रोहिणी ने सेशल मीडिया ‘X’ लिखा— समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी आत्ममंथन करने और जिम्मेदारी लेने की है। उन्होंने तेजस्वी के आसपास रहने वाले नेताओं की तुलना ‘गिद्धों‘ से की और कहा कि जब तक इन कब्जा जमाए बैठे लोगों को हटाया नहीं जाएगा, तब तक ऐसी समीक्षाओं का कोई अर्थ नहीं है।
रोहिणी आचार्य की यह नाराजगी नई नहीं है। वे पहले भी तेजस्वी के करीबी संजय यादव और रमीज की भूमिका पर सवाल उठा चुकी हैं। अब हार के बाद जब संगठन में बदलाव की बात चल रही है, तो रोहिणी का यह बयान उन कार्यकर्ताओं की भावनाओं को हवा दे रहा है जो नेतृत्व के सलाहकारों से दूरी महसूस करते हैं।
आरजेडी के लिए आगामी बजट सत्र और तेजस्वी की यात्रा साख बचाने की बड़ी चुनौती है। लेकिन जिस तरह से रोहिणी आचार्य ने पार्टी के ‘इनर सर्कल‘ पर हमला बोला है, उससे साफ है कि हार के घाव अभी भरे नहीं हैं।

