पटना: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का मतलब सिर्फ तिलकुट का स्वाद नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में खिचड़ी पकने का संकेत होता है। इस बार लालू यादव के ‘बड़े लाल‘ और जनशक्ति जनता दल (JJD) के मुखिया तेज प्रताप यादव ने मोर्चा संभाला है। परिवार और पार्टी से अलग होने के बाद यह तेज प्रताप का पहला ‘शक्ति प्रदर्शन‘ है। चौंकाने वाली बात यह है कि तेज प्रताप खुद एनडीए के कद्दावर नेताओं के दरवाजे पहुँच रहे हैं।
मकर संक्रांति की तैयारियों के बीच तेज प्रताप यादव ने अपनी सियासी सक्रियता से सबको चौंका दिया है। मंगलवार को तेज प्रताप सीधे उपेंद्र कुशवाहा के आवास पहुँचे। मौका था अपनी पार्टी की ओर से आयोजित ‘दही-चूड़ा भोज‘ का निमंत्रण देना। उन्होंने बिहार सरकार के नए मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया। कभी नीतीश सरकार और दीपक प्रकाश के मंत्री बनने पर तंज कसने वाले तेज प्रताप की यह ‘सॉफ्ट‘ डिप्लोमेसी बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है।
तेज प्रताप ने साफ कर दिया है कि 14 जनवरी को उनके आवास पर होने वाला यह भोज पूरी तरह सामाजिक और सांस्कृतिक है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और दोनों उप-मुख्यमंत्रियों को खुद कार्ड देने जाएंगे। वहीं, अपने छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी औपचारिक रूप से निमंत्रण भेजा जाएगा। तेज प्रताप का कहना है कि वे बिहार की पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं, जहाँ चूड़ा, दही और गुड़ के साथ रिश्तों की मिठास घोली जाती है।
सियासी गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक सांस्कृतिक भोज है? आरजेडी से दूर होने के बाद तेज प्रताप जिस तरह एनडीए नेताओं के साथ घुल-मिल रहे हैं, उससे ‘नए समीकरणों‘ की बू आ रही है। एक तरफ भाई तेजस्वी से सार्वजनिक दूरी और दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के नेताओं से मेल-मिलाप—तेज प्रताप का यह ‘दही-चूड़ा भोज‘ यह तय करेगा कि 2026 की जंग में वे किस पाले में खड़े नजर आएंगे।
बिहार की राजनीति में दही और चूड़ा का मिलन कभी-कभी नए गठबंधनों को जन्म देता है। तेज प्रताप यादव ने उपेंद्र कुशवाहा के घर जाकर जो शुरुआत की है, उसकी गूँज 14 जनवरी को उनके आवास पर होने वाले महाभोज में साफ़ सुनाई देगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई के बुलावे पर पहुँचते हैं या नहीं।

