पटना: जेल की सलाखों के पीछे से चुनाव जीतने वाले अनंत सिंह को बाहर लाने की कवायद अब तेज हो गई है। पहले केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार—अनंत सिंह के पूरे परिवार ने एक के बाद एक दिग्गज नेताओं से मुलाकात की है। कहने को तो यह ‘शिष्टाचार भेंट‘ है, लेकिन सियासी गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या ‘छोटे सरकार‘ की रिहाई का रास्ता साफ होने वाला है?
पटना का 1 अणे मार्ग यानी मुख्यमंत्री आवास… यहाँ अचानक हुई एक मुलाकात ने बिहार की राजनीति का पारा चढ़ा दिया है। नवनिर्वाचित विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और उनके दोनों बेटे, अंकित और अभिषेक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। चुनाव 2025 में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद यह पहला मौका है जब अनंत सिंह का परिवार सीधे सीएम के दरबार में हाजिर हुआ है। हालांकि परिवार इसे एक औपचारिक मुलाकात बता रहा है, लेकिन टाइमिंग कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री से मिलने के ठीक एक दिन पहले इस परिवार ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से भी मुलाकात की थी। अनंत सिंह को ललन सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में नाम आने और जमानत याचिका खारिज होने के बाद, परिवार का इन बड़े नेताओं से लगातार मिलना साफ इशारा कर रहा है कि पर्दे के पीछे ‘छोटे सरकार‘ को कानूनी बाधाओं से निकालने की कोई बड़ी रणनीति तैयार हो रही है।
मोकामा में अनंत सिंह के समर्थक इस उम्मीद में बैठे हैं कि एनडीए की सरकार बनने के बाद अब ‘छोटे सरकार‘ की मुश्किलें कम होंगी। लेकिन राह इतनी आसान नहीं है। कानूनी बाधाओं के चलते अनंत सिंह अब तक विधायक पद की शपथ भी नहीं ले सके हैं। ऐसे में सीएम नीतीश कुमार से हुई यह मुलाकात क्या उन्हें जेल से बाहर लाने में संजीवनी का काम करेगी? यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।
बिहार की राजनीति में शिष्टाचार भेंट के मायने हमेशा सियासी ही होते हैं। अनंत सिंह का परिवार अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है—एक तरफ कानूनी लड़ाई और दूसरी तरफ सियासी पैरवी। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री से हुई ये बैक-टू-बैक मुलाकातें अनंत सिंह को बेऊर जेल से बाहर निकालकर विधानसभा की दहलीज तक कब पहुँचाती हैं।

