जीतन राम मांझी का ‘चुनावी खुलासा’ या वीडियो से छेड़छाड़? चुनाव जीतने के कथित फॉर्मूले पर बिहार में मची रार

बिहार की राजनीति में आरोपों और पलटवार का दौर तो पुराना है, लेकिन क्या कभी कोई बड़ा नेता खुद मंच से चुनाव जीतने का ‘शाही फॉर्मूला’ बता सकता है? केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। इसमें वे कथित तौर पर यह कहते सुने जा रहे हैं कि कैसे हारते हुए चुनाव को जीत में बदला जाता है। इस एक बयान ने बिहार से लेकर दिल्ली तक सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्ष इसे लोकतंत्र की हत्या बता रहा है, तो मांझी इसे साजिश कह रहे हैं।

विवाद की जड़ है गया जिले के बाराचट्टी का वो कार्यक्रम, जहां जीतन राम मांझी अपने देसी अंदाज में जनता को संबोधित कर रहे थे। लेकिन बातों-बातों में उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जिससे पूरी निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। मांझी ने मगही लहजे में कहा कि 2020 में एक उम्मीदवार 2700 वोट से हार रहा था, लेकिन उनके प्रयास और तत्कालीन डीएम अभिषेक सिंह की मदद से उसे जीता दिया गया। मांझी को इस बात का मलाल था कि 2025 में वही सीट महज 1600 वोट से हार गई, क्योंकि उन्हें समय पर जानकारी नहीं दी गई।

जैसे ही यह वीडियो सामने आया, आरजेडी ने मोर्चा खोल दिया। आरजेडी ने इसे ‘वोट चोरी का सबूत’ बताते हुए चुनाव आयोग को घेरा है। आरजेडी का आरोप है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव को इसी तरह की धांधली करके सत्ता से दूर रखा गया। आरजेडी ने तत्कालीन डीएम अभिषेक सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें संविधान की धज्जियां उड़ाने के बदले ‘रिवॉर्ड’ दिया गया।

चौतरफा घिरे जीतन राम मांझी ने अब इस पर सफाई दी है। उन्होंने साफ कहा है कि उनके वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। मांझी ने इसे खुद को बदनाम करने की साजिश बताते हुए कड़े शब्दों में कहा कि अब ‘मांझी एक ब्रांड’ है और वे किसी से डरने वाले नहीं हैं।झी का यह बयान महज एक जुबान फिसलना है या फिर बिहार के चुनावी सिस्टम की कोई कड़वी सच्चाई, यह जांच का विषय है। लेकिन 2025 के चुनावी नतीजों के बाद उठे इस विवाद ने बिहार की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है।

Advertise with us