आपरेशन सिंदूर भारत के अभिमान का विषय – रूपा रावल राष्ट्र सेविका समिति, दिल्ली प्रान्त प्रवेश वर्ग, समापन समारोह

 

नई दिल्ली, राष्ट्र सेविका समिति, दिल्ली, शांति ज्ञान निकेतन गोयला खुर्द, द्वारका,दिल्ली। दिल्ली प्रान्त ने आज अपने 15 दिवसीय शिक्षा वर्ग- प्रवेश जो 18 मई, 2025 से आरंभ हुआ आज उसका समापन समारोह संपन्न हुआ l इस वर्ग में पूरी दिल्ली से 137 सेविकाएं सम्मलित हुई l

इस वर्ग की सेविकाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख श्रीमती रूपा रावल जी ने कहा कि एक महिला का सिन्दूर केवल एक रंग नहीं अपितु त्याग शौर्य एवं बलिदान का प्रतीक है l सत्यवान को मृत्यु के मुख से वापस लाने की शक्ति भारतीय महिला का सिन्दूर रखता है l
उन्होंने आगे कहा कि पहलगाम आतंकी हमले की जवाबी कार्रवाई में ऑपरेशन सिन्दूर जो भारत की सेनाओं का एक सफलता पूर्वक शक्ति प्रदर्शन था उसकी राष्ट्र सेविका समिति सराहना करते हुए कहा कि सिंदूर नारी का गौरव है इसलिए इस ऑपरेशन का नाम सिंदूर दिया गया। 22 अप्रैल को पहलगाम में हताहत हुए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि सिंदूर की ताकत से ही भगवान राम वन से वापस आएं। हमारी संस्कृति में सिंदूर का उच्च स्थान है। ऑपरेशन सिंदूर ताकत दिखाने के लिए नहीं किया गया था, बल्कि यह बताने के लिए किया गया था कि अगर कोई हमसे शत्रुता करता है, तो उसे उसी की भाषा में सटीक जवाब दिया जा सकें। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने चीनी शस्त्रों की भी हवा निकाल दी। ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेश तकनीकी से बनी हुई आकाश एयर डिफेंस सिस्टम का बड़ा योगदान था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद स्वदेशी तकनीकी पर लोगों का विश्वास कायम हुआ है। भारत का स्व अब जागृत हो रहा है। कोराना काल में भी स्वनिर्मित वैक्सीन ने न केवल देश में बल्कि अन्य देशों में लोगों की जान बचाई। हम एक समाज के नाते राष्ट्र निर्माण के पथ पर चलते हुए परम वैभव की आर बढ़ रहे है।अब भारत का उदय निश्चित है बस समाज को निरंतर परिवर्तन करना होगा और प्रयास करना होगा l ऑपरेशन सिन्दूर के बाद विश्व ने एक नए भारत को देखा है l वो भारत जो आत्म रक्षा कर सकता है और सज्जनों को दुर्बल समझने वाले रावण रूपी दुश्मन को शक्ति के सिन्दूर से ध्वस्त भी कर सकता है l

उन्होंने यह भी कहा कि समाज का युवा वोकिज्म जैसे विषयों से न भ्रमित हो इसके लिए गुणात्मक शाखा की आवश्यकता है, कार्य विस्तार की आवश्यकता है और समाज की सज्जन शक्तियों को एकत्रित एवं संगठित करने की आवश्यकता है जो राष्ट्र सेविका समिति वर्त्तमान में महिलाओं के बीच में 89 वर्षों से कर रही है l
ऑपरेशन सिंदूर देश के लिए गर्व की बात है। माताओं, बहनों की मांग में चमकता सिंदूर केवल रंग नहीं है, वह सम्मान का प्रतीक है, त्याग का प्रतीक है, शौर्य का प्रतीक है। यह केवल स्नेह प्रदर्शन का प्रतीक नहीं है बल्कि शौर्य का प्रतीक है। सिंदूर की ताकत की वजह से केवल तीन दिनों में ही शत्रुओं को घुटने के बल ला दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षा श्रीमती शशि बुबना जी ने सेविकाओं को राष्ट्र कार्य में निरंतर बढ़ते रहने की प्रेरणा दी I
इस अवसर पर वर्गाधिकारी डॉ. हर्षा भार्गवी ने बताया कि राष्ट्र सेविका समिति के प्रवेश वर्ग में लगभग 137 बालिकाएं, किशोरियां और महिलाओं ने 15 दिन के प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया। 18 मई को जब शिक्षार्थी बहनें प्रवेश वर्ग में आईं थीं तो उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि यहां उनका शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास एक साथ संभव होगाI पंद्रह दिन यहां रहकर उन्होंने अपने देश की महान संस्कृति व देश की महान विभूतियों के बारे में भी जानकारियां प्राप्त कीं हैं I डॉक्टर चारू कालूराम दिल्ली प्रांत संचालिका ने भी प्रवेश वर्गों के महत्व पर बल दिया। प्रवेश वर्ग में 14 वर्ष से लेकर लगभग 55 वर्ष तक आयु सीमा होती है। यहां एक साथ रहकर उन्होंने सामाजिक समरसता,आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्म स्वाभिमान जैसे गुण सीखेंI उन्होंने कहा कि इस वर्ग से जो युवतियां निकलेंगी यह तय है कि वे अपनी रक्षा स्वयं कर सकेंगी I यह प्रवेश वर्ग बालिकाओं और महिलाओं के जीवन को नयी दिशा देते हैं I छोटी बालिकाओं के मन मस्तिष्क में जो बीज बो दिया जाता है वही उनकी जीवन यात्रा का मजबूत आधार बनता है I वे यह सीखकर जाती हैं कि जीवन केवल अपने लिए नहीं होता बल्कि वह समाज और देश के लिए भी होता है I
वर्ग में बालिकाओं ने नियुद्ध, (जूडो-कराटे), योग, दंड प्रहार, छुरी प्रहार, यष्टी, के सुन्दर प्रदर्शन से सभी को हर्षित कर दिया I
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती नैंसी जुनेजा जो की रिवअप लाइफ स्किल्स की फाउंडर एवं सीईओ हैं ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें अपने हिन्दू होने एवं हिन्दू परिवार में जन्म लेने पर गर्व है l समाज में कार्य करने के साथ साथ अपनी संस्कृति से जड़ित रहना आवश्यक है l सुनीता भाटिया (दिल्ली प्रांत कार्यवाहिका), विजया शर्मा (दिल्ली प्रांत प्रचारिका व अखिल भारतीय महाविद्यालयीन तरुणी प्रमुख) , प्रतिभा बिष्ट (दिल्ली प्रांत सह कार्यवाहिका) , अधिकारीगण, सेविका बहनें और अभिभावक गण के साथ बड़ी संख्या में सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे।
वर्तमान में पूरे देश भर में 4 लाख सेविकाएं हैं तथा 4125 शाखाएं चल रही है तथा 45 पूर्णकालिक प्रचारिकाएं हैं । इसके साथ 100 विस्तारिकाएं समिति कार्य को विस्तार देने में संलग्न हैं।

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