पटना के गांधी मैदान में चल रहे 41वें पुस्तक मेले में ज्ञान के साथ-साथ एक सनसनी भी फैली हुई है। एक किताब, जिसकी कीमत है पूरे 15 करोड़ रुपये! जी हाँ, आपने सही पढ़ा। 15 करोड़ की यह किताब ‘मैं’, इन दिनों मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है। लेखक का दावा और कीमत दोनों ही चौंकाने वाले हैं।
ज्ञान की इस महागाथा में एक किताब ने सारी सुर्खियां बटोर ली हैं। मंच से दूर, एक विशेष शोकेस में सजी यह किताब ‘मैं’ (Main) है, जिसकी कीमत पूरे 15 करोड़ रुपये रखी गई है। मेले में आए हर शख्स की जिज्ञासा इस शोकेस पर आकर ठहर जाती है।
408 पन्नों के इस ग्रंथ के लेखक हैं बिहार के रत्नेश्वर। रत्नेश्वर का दावा है कि यह कोई सामान्य रचना नहीं, बल्कि ‘परम ज्ञान’ का आविष्कार है। यह ज्ञान उन्हें किसी अध्ययन से नहीं, बल्कि ब्रह्मलोक की यात्रा और अलौकिक अनुभव से प्राप्त हुआ है।
सबसे चौंकाने वाला पहलू इस किताब को लिखने में लगा समय है। लेखक रत्नेश्वर का दावा है कि उन्होंने यह पूरा ग्रंथ मात्र तीन घंटे चौबीस मिनट के रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया। यह दावा ही इस किताब के रहस्य को और अधिक बढ़ा देता है। यह ग्रंथ हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित किया गया है। लेखक ने बताया कि इसकी कुल 16 प्रतियां छापी गई हैं। इनमें से केवल तीन प्रतियां ही बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
15 करोड़ की कीमत के चलते इस किताब को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। पुस्तक मेले में आए उत्सुक पाठक इसे देखना तो चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से किसी को भी इस रहस्यमयी ग्रंथ के पन्ने पलटने की इजाजत नहीं है। कई लोग इस कीमत को पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं, लेकिन लेखक अपने दावे पर अडिग हैं।

