यादें…यादें…बस यादें-अतुल गंगवार

अतुल गंगवार

इरफान खान से मेरा परिचय बस एक मुलाकात का ही था। पान सिंह तोमर के प्रचार के लिए वह सहारा टीवी आये थे। उनके साथ फिल्म के निर्देशक तिग्मांशु धूलिया थे। शो था ताऊ की खरी खरी। जिसमें मैं बतौर ताऊ खाट पर बैठ कर, हुक्का लगा कर, आये मेहमानों से बात करता था। इरफान बड़े अभिनेता थे मेरा शो नया था। मैं खुद भी पार्ट टाइम एंकर था। सहारा में रहकर मैने कई किरदार निभाए थे उसमें से पार्ट टाइम एंकरिंग भी एक थी। कभी ताऊ, कभी वकील, कभी चायवाला, कभी नेता जो भी मिलता कर लेता था। खैर हमारी प्रोडयूसर सुचि स्मिता जी का मेरे पास फोन आया कि अतुल चैनल में इरफान और तिग्मांशु आने वाले हैं तुम चाहो तो अपने शो के लिए भी उनका इंटरव्यू रिकार्ड कर लो। मैने शुचि जी को कहा आप एक बार उन लोगों को मेरे शो का कॉंसेप्ट बता दो। पता नहीं वह इस तरह के शो में बैठना चाहेंगे कि नही। हालांकि उस समय तक मेरा शो थोड़ा चर्चित होने लगा था। कैलाश खेर, मनोज तिवारी उसमें अतिथि के तौर पर आ चुके थे। कैलाश खेर ने तो मेरे शो का टाइटल गीत भी गाया था। खैर अभी हम बात कर रहे थे इरफान भाई के मेरे शो में आने की। शुचि जी ने उनसे बात करके मुझे फोन किया कि उन लोगों को शो का कॉंसेप्ट पसंद आया है और वो ताऊ के साथ खाट पर बैठने के लिए तैयार हैं। मैं बहुत खुश था कि इरफान खान जैसा बड़ा अभिनेता मेरे शो में आने वाला है।

शो की तैयारी हो गई। लेकिन तभी सहारा की राजनीति शुरू हो गयी। एक वरिष्ठ को इस बात का बुरा लग गया कि कैसे बिना उनकी मर्जी के इरफान और तिग्मांशु मेरे शो में आ रहे हैं। शुचि जी इस अंदर के खेल को सुलटाने में लग गयीं और मैं इरफान भाई और तिग्मांशु जी के साथ ( वो तब तक चैनल आ चुके थे) खाट पर बैठ कर बातचीत करने लगा। इंतजार था कि कब हरी झंडी मिले तो शो शूट हो। दिमाग परेशान था। दोनों लोग आकर बैठे हुए थे। पूरा क्रू रेडी था। लगभग 20 मिनट का समय उनके साथ बात करने के लिए मिला। इरफान जितने सहज थे बात करने में लग ही नहीं रहा था कि एक बड़े अभिनेता के साथ बैठा हूं। कोई जल्दबाजी नहीं। एक बार पूछा बस क्या देर है मैने कहा थोड़ा टेक्निकल प्राब्लम है। उन्होंने अपनी चिरपरिचित अंदाज में हंसते हुए कहा- अच्छा… सब समझ आ रहा है। तभी शुचि जी वहां आई और उन्होंने शूट शुरू करने का इशारा किया । एक बड़ी दिलचस्प बातचीत इरफान और तिग्मांशु के साथ हुई। शूट खत्म हुआ। इरफान भाई बेहद खुश थे और मैं भी। शो बेहद अच्छा बन पड़ा था। मुझे खुशी इस बात की थी देश के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक ताऊ की खाट पर ठाट से बैठा था। इरफान और तिग्मांशु भाई चले गए और मैं भी न्यूज़ रूम की ओर बढ़ा शो को एडिट कराने के लिए।

न्यूज़ रूम में एक खबर मेरा इंतज़ार कर रही थी। वरिष्ठ साहब ने इस इंटरव्यू को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया। पता चला ऊपर तक मेरी शुचि जी की शिकायत हो गई है। बाद में मुझे एच आर को स्पष्टीकरण तक देना पड़ा कि मैने क्यूं ये इंटरव्यू किया। मैने भी लिखा एक नवोदित अभिनेता इरफान खान और बी ग्रेड के डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया अपनी सी ग्रेड की डाकुओं वाली फिल्म पान सिंह तोमर को प्रमोट करना चाहते थे। उन्होंने मुझे लालच दिया जिसमें फंस कर मैने ये इंटरव्यू कर दिया। मामला तो वहीं रफा दफा हो गया लेकिन वरिष्ठ साहब अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आये और उन्होंने वह इंटरव्यू टेलिकास्ट नहीं होने दिया और ना ही वह फुटेज किसी के हाथ लगने दी। इत्तफाक से उस इंटरव्यू की एकमात्र निशानी ये तस्वीर बची रह गयी।

इरफान भाई आप जहां भी रहें सुकून से रहें। आपके परिवार के लिए मैं प्रार्थना करता हूं आपकी कमी तो कोई पूरा नहीं कर सकता लेकिन उन्हें ये दर्द सहने की ताकत दे।