देश के सुपर मार्केट में अब दिखेगा ट्राइबल फूड “कोदो”, स्वाबलंबी बनेगा महिला समूह, ब्रांडिंग करेगी सेंट्रल यूनिवर्सिटी अमरकंटक

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लेखक प्रो. टी. वी. कटटीमनी  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के कुलपति हैं।

बिहार अपडेट,अमरकंटक। डायबिटीज से ग्रस्त मरीजों या स्वदेशी उत्पादों के शौकीन लोगों को केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक शीघ्र ही नई सौगात देने की तैयारी में है। दरअसल, कोदो राइस की मार्केटिंग विश्वविद्यालय के द्वारा की जाएगी। जनजातीय बाहुल्य अमरकंटक क्षेत्र में बड़ी मात्रा में लगाए जाने वाले इस विशिष्ट किस्म के चावल (कोदो) को देशभर के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में कवायद शुरू की जा रही है। वह दिन दूर नहीं होगा जब औषधीय गुणों से भरपूर और डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभदायक कोदो आकर्षक पैकिंग के जरिए बड़े-बड़े सुपर मार्केट तक पहुंचेगा। मेन स्ट्रीम बिजनेस पॉलिसी से जुड़कर आदिवासी वर्ग के लोग विकास की नई इबारत लिखेंगे।

इस कड़ी को आगे बढ़ाने की दिशा में अब इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक ने कोदो की ब्रांडिंग और विक्रय का दारोमदार उठाया है। केंद्रीय विश्वविद्यालय की इस कवायद के बाद जल्द ही औषधीय गुणों से भरपूर कोदो राइस बड़े-बडे़ शॉपिंग माल तक पहुंचाया जाएगा। विश्वविद्यालय और जिला कृषि विभाग की यह संयुक्त पहल बिजनेस मॉडल की पहली कड़ी बताई जा रही है।
आदिवासी महिलाओं के लिए मजबूत आजीविका संसाधनों को तैयार करने की दिशा में विश्वविद्यालय की यह नई पहल है। इसके अंतर्गत यूनिवर्सिटी ब्रांडिंग के जरिए आदिवासी उत्पादों को सुपर मार्केट के जरिए लोगों तक पहुंचाएगी। विश्वविद्यालय के आजीविका व्यापार केंद्र समन्वयक डॉ. आशीष माथुर ने बताया कि कृषि विभाग के सहयोग से विश्वविद्यालय आसपास के आदिवासी बाहुल्य गांवों में कृषि आधारित उत्पादों की मार्केटिंग करने पर कार्य किया जा रहा है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभदायक कोदो राइस
आयुर्वेदिक महत्व के अनुरूप कोदो को कई औषधीय गुणों से पूर्ण होना पाया गया है। खासकर यह डायबिटीज के मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी और उपयुक्त है। जिला कृषि अधिकारी एनडी गुप्ता ने बताया कि जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में यह फसल भारी मात्रा में लगाई जाती थी, लेकिन धान की फसल ने कोदो का स्थान ले लिया और अब सीमित रकबे में फसल उत्पादन हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में इसके लाभकारी गुणों को देखते हुए मार्केट में इसकी डिमांड बढ़ी है। कोदो का सेवन स्वस्थ लोगों के अलावा डायबिटिक मरीज भी करते हैं, जोकि मधुमेह नियंत्रण, गुर्दा रोग, पित्तनाषक, कफ संबंधित समस्याओं के लिए कारगर है।
महिला समूहों को मिलेगा लाभ
यूनिवर्सिटी के आजीविका व्यापार केंद्र समन्वयक डॉ. आशीष माथुर ने बताया कि लाभकारी गुणों के कारण कोदो की मार्केट में डिमांड तो है, लेकिन इस फसल को बड़े व्यापारिक केंद्रों तक सुलभ नहीं किया जा सका है। विश्वविद्यालय बहपुरी गांव की लक्ष्मी और सतगुरू स्व-सहायता समूह के जरिए कोदो की पैकेजिंग कराएगा। इसके बाद गुणवत्ता युक्त उत्पादों को बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। समूह की महिलाओं को इस उत्पाद का लाभांश प्राप्त होगा और अब तक जिस फसल पर वे लाभ की उम्मीदें भी नहीं लगाए थे, उसे लाभ से जोड़ा जाएगा। विश्वविद्यालय के इस प्रयास के बाद महिला समूह की आर्थिक स्थिति सुधरेगी साथ ही लोगों को इस औषधीय फसल का लाभ भी मिलेगा। डॉ. माथुर ने बताया कि कोदो पैकजिंग के साथ ही विश्वविद्यालय जल्द वनांचल से प्राप्त शहद की प्रोसेसिंग और पैकजिंग पर भी कार्य करेगा। इसके अलावा ऐसे कई अन्य छोटे-छोटे उद्योगों के जरिए क्षेत्र के जनजातीय वर्ग की आजीविका सुदृढ़ की जाएगी।
समग्र विकास जरूरी
जनजातीय वर्ग के लोगों के समग्र विकास के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में विश्वविद्यालय लगातार कार्य कर रहा है। गुणवत्ता युक्त शिक्षा के साथ ही जनजातीय वर्ग के लोगों को छोटे-छोटे उद्योगों से जोड़ना जरूरी है। आजीविका के सशक्त माध्यम तैयार कर समग्र विकास की कल्पना पूरी की जा सकती है। हमने आजीविका केंद्र के जरिए कई अन्य उद्योगों की भी रूपरेखा तैयार की है, जो कि जल्द ही साकार होगी।