न्यायिक प्रक्रिया का करते हैं सम्मान, लेकिन न्यायलय से ऊपर हैं भगवान श्री राम, इसलिए मंदिर का निर्माण शीघ्र हो – महंत नृत्यगोपाल दास

शुक्रवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में तीन दिवसीय अयोध्या पर्व का शुभारंभ राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास और अवधेशानंद गिरी महाराज के कर कमलो से हुआ। वही, चौरासी कोसी परिक्रमा पर लगी प्रदर्शनी का उद्घाटन केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने किया। इस मौके पर महंत नृत्यगोपाल दास ने अपने संबोधन में कहा कि केन्द्र में नरेन्द्र मोदी और प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है, जो राम मंदिर निर्माण के लिए एक अच्छा संयोग है। राम लला मंदिर का निर्माण किसी भी सूरत में शुरू हो जाना चाहिए।  देश व विदेशों में रहने वाली सभी लोग चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण हो क्योंकि मंदिर का निर्माण, भारत का निर्माण है और भारत का निर्माण, विश्व का निर्माण है। उन्होंने कहा कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं लेकिन भगवान राम इनसब से ऊपर हैं। अयोध्या में बहुत दिनों से कार सेवकों द्वरा लाए हए पत्थर प्रतीक्षा कर रहे हैं कि कब उनका इस्तेमाल होगा। सभी लोगों को यह याद रखना चाहिए ये अयोध्या त्रेता की नहीं है, महाराज मनु के युग की है। मनु  विश्व के आदिशासक हैं उन्होंने अयोध्या का निर्माण किया, जो विश्व की सबसे पुरानी नगरी है। इसलिए मोदी जी और योगी जी को शीघ्र अतिशीघ्र मंदिर निर्माण का काम शुरू करना चाहिए। सभी लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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अयोध्या पर्व के मंच से जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज ने अयोध्या और राम के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

इस मौके पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि अयोध्या का महत्व को प्रस्तुत करने के लिए यह उत्सव का आयोजन हुआ है। जिससे लड़ा नहीं जा सकता वह अयोध्या है। लेकिन हमारे इतिहास का यह दुर्भाग्य है कि जिससे लड़ा नहीं जा सकता उसी से हमारी न्यायपालिका, राज्य व्यवस्था, सरकारें लड़ने की कोशिश कर रही है। इसलिए उस अयोध्या को जानना जरूरी है जिससे लड़ा नहीं जा सकता है। दूसरी सबसे बड़ी बात है कि जब भी अयोध्या के बारे में बात होती है तो फैजाबाद और अयोध्या के कसबों को ही अयोध्या मान लेते हैं। लेकिन अयोध्या के चारो तरफ 141 ऐसे स्थल हैं जो पौराणिक है और उन स्थानों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और लोगों को जानकारी भी नहीं है। इसलिए लोगों को इसके बारे में जानना चाहिए, ये स्थली योगियों के स्थान हैं। मुझे उम्मीद है कि इस पर्व से लोगों को अयोध्य़ा के आयाम के बारे में जानकारी प्राप्त होगी।

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अयोध्या पर्व के सचिव राकेश सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का मकसद राम और अयोध्या की संस्कृति को जन जन तक पहुंचाना है। इस तरह के कार्यक्रम देश के कोने कोने में आयोजित होगा जिससे राम की नगरी अयोध्या को जन जन तक पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम के संयोजक और आयोध्या के सांसद लल्लू सिंह ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि अयोध्या की पृष्ठभूमि बड़ी है इसे समझाने के लिए ही इस वृहद पर्व का आयोजन राजधानी में किया गया है। लोगों की आस्था से जुड़ी इस नगरी के धार्मिक व सांस्कृतिक आयाम को अगले दो दिनों में प्रदर्शित किया जाएगा।

 इस मौके पर प्रज्ञा संस्थान के अध्यक्ष जवाहर लाल कौल, विश्व हिंदू परिषद् के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय, राष्ट्रीय महामंत्री पंकज सिंह, अयोध्या के विधायक समेत अयोध्या से आए हजारों लोग मौजूद थे।

पर्व में और क्या क्या है खास  —–

बड़ी अयोध्या को दर्शाने के लिए 84 कोसी परिक्रमा पर खास प्रदर्शनी लगाई गई है। अयोध्या की 84 कोसी परिधि में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व की स्थलों को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इन स्थलों में मखमौड़ा धाम जो पुत्र कामेश यज्ञ स्थल के नाम से मशहूर है, श्रृंगी ऋषि आश्रम, जंबू द्वीप प्रमुख हैं। 84 कोसी परिक्रमा अयोध्या के आसपास के चार जिलों को जोड़ता है, इसमें अंबेडकर नगर, बाराबंकी, गौंडा व बस्ती शामिल है।

आयोध्या के पकवान

अयोध्या पर्व में खासतौर पर सीता की रसोई की व्यवस्था की गई है जिसमें अयोध्या नगरी के जायके रखें गए हैं। अयोध्या में पकाए और खाएं जाने वाले लजीज व्यंजनों में रिकवज, निमोना, फर्रा, इमरती रबड़ी, दही जलेबी, चना कचौड़ी के स्टॉल लगाए गए हैं। दिवसीय इस पर्व में लोग अयोध्या नगरी के जायकों का लुत्फ उठा सकतें हैं।