देहदान और अंगदान को लेकर भ्रम दूर करना ज़रूरी- आलोक कुमार

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2021 तक दिल्ली-एनसीआर को बनाएंगे कॉर्निया अन्धता-मुक्त
 दिल्ली एनसीआर क्षेत्र को कॉर्नियल अन्धता मुक्त बनाने के लिए दधीचि देहदान समिति ने 2021 तक का लक्ष्य रखा है। दधीचि देहदान समिति के संरक्षक और संस्थापक माननीय आलोक कुमार ने दिल्ली के हरियाणा भवन में आयोजित दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के कार्यक्रम में ये खुलासा किया। आलोक कुमार ने बताया कि दिल्ली में दो बड़े अस्पताल एम्स और गुरुनानक नेत्र चिकित्सालय में कॉर्निया अंधता का इलाज नेत्रदान के माध्यम से किया जाता है। यहां वर्तमान प्रतीक्षा सूची क्रमश: 2 हजार और 1 हजार है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दधीचि देहदान समिति व्यापक स्तर पर जनजागरण अभियान चलाएगा।
देहदान नहीं आता मोक्ष के आड़े- आलोक कुमार
देहदान- वर्तमान समय की आवश्यकता विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में भिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के समक्ष आलोक कुमार ने बताया कि भारतीय परम्पराओं और मान्यताओं में ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया’ की अवधारणा बताती है कि आज हमारे समाज को स्वस्थ रहने के लिए उसी अवधारणा पर चलने की नितांत आवश्यकता है, जिसका एकमात्र समाधान है अंगदान और देहदान। आलोक कुमार ने कहा कि देहदान विश्व में सर्वोच्च महादान है, और मृत्यु के पश्चात भी यदि मानवता के कार्य में इस देह का उपयोग हो जाए, तो इससे बड़ा पुण्यकर्म कोई हो नहीं सकता।
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बीते दशक में बढ़ा देहदान और अंगदान का आंकड़ा
आलोक कुमार जी के अनुसार 22 वर्ष पहले संस्था ने इस पुनीत कार्य की शुरुआत की, जिसमें अब तक 900 से अधिक नेत्रदान के साथ साथ सम्पूर्ण शरीर के 275 दान सम्पन्न किए जा चुके हैं। ये आंकड़ा 2010 के बाद का है। आलोक कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में देहदान व अंगदान की समुचित और सुचारू व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे सामान्य जन, स्वयं की प्रेरणा से अंगदान व देहदान का संकल्प ले सकें। आलोक कुमार के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसीलिए जो भी संकल्प लेना चाहें, उन्हें परिवार की सहमति लेनी चाहिए। समिति इस मामले के सभी तकनीकि पहलुओं पर काम करती है, इसीलिए मस्तिष्क-मृत्यू की अवस्था में निश्चित समयावधि में मृतक के अंगों को जरूरतमंदों तक पहुंचा दिया जाता है। समिति केवल सरकारी संस्थानों को ही अंग या देह पहुंचाती है। सामान्य मुत्यू की अवस्था में भी नेत्रों, त्वचा व हड्डियों के दान के लिए शुरुआती कुछेक घंटों का समय महत्वपूर्ण रहता है।
धार्मिक मान्यताओ के सम्मत है देहदान और अंगदान
समाज के एक वर्ग में अंगदान या देहदान को लेकर धार्मिक मान्यताओँ के कारण विरोध भी रहता है। आलोक कुमार के अनुसार समिति के प्रयासों से ज्यादातर धर्मगुरुओं ने अपनी सार्वजनिक सभाओं में देहदान व अंगदान को धर्म सम्मत बताना शुरु किया है, जिससे समाज में बीते कुछ वर्षों से इस विषय में जागरुकता बढ़ी है। इसीलिए लगभग 3 साल पहले सिर्फ 7 दिन के बच्चे का सबसे बड़ा देहदान हुआ। इसी कारण राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दधीचि देहदान समिति के कार्यक्रम में उस बच्चे के पिता को राष्ट्रपति भवन में मंच पर बुलाकर सम्मानित भी किया।
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इस कार्यक्रम में समिति के महामंत्री कमल खुराना और उपाध्यक्ष विशाल चड्ढा उपस्थित थे। दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग पुनेठा, महासचिव सचिन बुधौलिया और उपाध्यक्ष अतुल गंगवार ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (इंडिया) के महासचिव मनोज वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडे, आलोक गोस्वामी, आदित्य भारद्वाज, निशि भाट, राज चावला, मनीष ठाकुर, श्याम किशोर, विकास कौशिक समेत कई पत्रकार मौजूद रहे।