एक भारत, एक संविधान विषय पर दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज में संगोष्ठी का आयोजन

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बिहार अपडेट, नई दिल्ली , महिला विकास प्रकोष्ठ, दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज ने दिल्ली की प्रबुद्ध महिलाओं के बीच काम करने वाले समूह मेधाविनी सिंधु सृजन  के साथ मिलकर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। श्री आशुतोष भटनागर प्रमुख  वक्ता थे, जो वर्तमान में जम्मू और कश्मीर स्टडी सर्कल के निदेशक हैं। उन्होंने आज के ज्वलंत विषय अनुच्छेद 370 और 35 A की निरस्ती : एक भारत एक संविधान  पर वार्ता की। उन्होंने भारत के नागरिकों के उन प्रमुख अधिकारों पर प्रकाश डाला जो विशेष रूप से महिलाओं, वाल्मीकि समाज, गोरखाओं और अल्पसंख्यकों जैसे जम्मू और कश्मीर के अनुसूचित जाति  और जनजाति इत्यादि वर्गों के लिए उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के अलग संविधान और उसके उन्मूलन के बारे में भी बात की। उन्होंने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के तरीके पर प्रमुख रूप से ध्यान केंद्रित किया। इस संदर्भ में उन्होंने संसद द्वारा अपनाई गई पूरी प्रक्रिया को समझाया जो न केवल संवैधानिक रूप से सही है, बल्कि इस अनुच्छेद के संविधान में शामिल होने के समय अपनाई गई प्रक्रिया की पुनरावृत्ति मात्र है । उन्होंने जम्मू-कश्मीर के बाहर के व्यक्ति से शादी करने पर कश्मीरी महिलाओं को अपने बच्चों को संपत्ति हस्तांतरण करने में आने वाली मुश्किलों की भी विस्तार से चर्चा की । महिला विकास प्रकोष्ठ और  मेधाविनी सिंधु सृजन की संयोजिका डॉ निशा राणा  ने अनुच्छेद 370 के कारण महिलाओं के साथ भेदभाव के कुछ और उदाहरणों पर चर्चा की। दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज  के लगभग 200 छात्र, 20 शिक्षक और मेधाविनी सिंधु सृजन समूह के सदस्यों ने इस आयोजन में सक्रिय रूप से  भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया । आयोजन के अंत में  प्रश्न-उत्तर सत्र बेहद दिलचस्प था, जहां कई छात्रों ने अनुच्छेद को निरस्त करने की  संसदीय प्रक्रिया और उसके बाद की प्रक्रिया पर प्रश्न पूछे और वक्ता ने उनके  सविस्तार उत्तर दिए  और इसके बाद की प्रक्रिया के बारे में अपने प्रश्न पूछे। उनके सवालों का जवाब वक्ता ने बड़े विस्तार से दिया।
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